राजीव गांधी की जयंती पर राहुल गांधी का भावुक संदेश, मां सोनिया की अनकही कहानी जल्द आएगी सामने..

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी को लेकर एक बेहद भावुक संदेश साझा किया। राहुल गांधी ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि राजीव गांधी के निधन के बाद बीते 35 वर्षों से ज्यादा समय में उन्होंने अपनी मां को हर मुश्किल का सामना असाधारण साहस और गरिमा के साथ करते देखा है।
राजीव गांधी की जयंती पर राहुल गांधी का यह संदेश सिर्फ अपने पिता को श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सोनिया गांधी के उस निजी संघर्ष की झलक भी दिखाई दी, जिसे उन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर रखा। राहुल ने अपनी मां की आगामी संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें खुशी और गर्व है कि अब उनकी मां की कहानी उन लाखों लोगों तक पहुंचेगी, जो उनसे प्यार करते हैं।

राहुल गांधी ने मां सोनिया के लिए क्या लिखा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी मां सोनिया गांधी को संबोधित करते हुए लिखा कि उन्होंने अपने माता-पिता को आखिरी बार 35 साल से भी पहले एक साथ देखा था। इसके बाद राजीव गांधी के निधन के बाद सोनिया गांधी ने जिस तरह परिवार और जिंदगी की कठिन परिस्थितियों का सामना किया, राहुल ने उसकी विशेष रूप से सराहना की।
राहुल ने कहा कि केवल वह और उनकी बहन प्रियंका गांधी ही जानते हैं कि राजीव गांधी के जाने के बाद उनकी मां ने किन परिस्थितियों का सामना किया और उनका जीवन कितना मुश्किल हो गया था।
राहुल गांधी के संदेश का सबसे भावुक हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनकी मां की कहानी अब दुनिया के सामने आने जा रही है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सोनिया गांधी जैसी निजी जिंदगी पसंद करने वाली महिला के लिए अपनी निजी यादों और अनुभवों को दुनिया के सामने रखना आसान नहीं रहा होगा।
राहुल ने अपने पिता राजीव गांधी को याद करते हुए भावनात्मक अंदाज में कहा कि उन्हें लगता है कि आज उनके जन्मदिन पर राजीव गांधी अपनी ‘सुंदर सोनिया’ को देखकर मुस्कुरा रहे होंगे और उन पर गर्व कर रहे होंगे।
प्रियंका गांधी ने भी मां के संघर्ष को किया याद
राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर सोनिया गांधी की आने वाली किताब को लेकर गांधी परिवार की भावनाएं सामने आईं। राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपनी मां के जीवन, उनके साहस और परिवार के प्रति समर्पण को याद किया।
गांधी परिवार के दोनों बच्चों के संदेशों में एक बात खास तौर पर दिखाई दी—सोनिया गांधी के सार्वजनिक राजनीतिक जीवन से अलग उनके निजी संघर्ष को लेकर परिवार के भीतर गहरा सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव है।
10 नवंबर को रिलीज होगी सोनिया गांधी की किताब
सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। प्रकाशक Alfred A. Knopf ने इसकी घोषणा की है। किताब करीब 544 पन्नों की है और इसमें सोनिया गांधी के निजी जीवन के साथ-साथ भारत में उनके करीब छह दशकों के अनुभवों की झलक मिलने वाली है।
यह किताब सिर्फ एक राजनीतिक संस्मरण नहीं है। इसे प्रेम, परिवार, व्यक्तिगत नुकसान, जिम्मेदारी और भारत को अपना घर बनाने की कहानी के रूप में पेश किया गया है।
इटली से भारत तक का सफर
सोनिया गांधी का जन्म इटली में हुआ था। 1965 में 19 वर्ष की उम्र में जब वह इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। दोनों के बीच प्रेम संबंध विकसित हुआ और बाद में उन्होंने 25 फरवरी 1968 को शादी कर ली।
इसके बाद सोनिया गांधी भारत आईं और नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनीं। किताब में उनके शुरुआती जीवन से लेकर भारत आने और परिवार के साथ बिताए वर्षों तक की कई निजी यादों को शामिल किया गया है। प्रकाशक के विवरण के मुताबिक किताब की शुरुआत उनके बचपन और कैम्ब्रिज के दिनों से होती है, जहां से राजीव गांधी के साथ उनकी प्रेम कहानी आगे बढ़ती है।
इंदिरा गांधी के साथ रिश्ते और परिवार की त्रासदियां
‘Belonging’ में सोनिया गांधी अपनी सास और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ अपने रिश्ते को भी याद करती हैं। इंदिरा गांधी की 1984 में हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने।
लेकिन परिवार पर आया यह संकट यहीं नहीं रुका। करीब सात साल बाद 21 मई 1991 को राजीव गांधी की भी हत्या कर दी गई। इस घटना ने सोनिया गांधी की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।
सोनिया गांधी के मुताबिक, इन्हीं गहरे व्यक्तिगत दुखों और अपनों को खोने के अनुभवों ने उन्हें धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन और राजनीति की ओर धकेला। उन्होंने वर्षों तक अपनी निजी जिंदगी को बेहद सुरक्षित रखा था, लेकिन अब अपनी किताब के माध्यम से वह उन अनुभवों को पाठकों के साथ साझा करने जा रही हैं।
राजीव गांधी की मौत के बाद बदली सोनिया गांधी की जिंदगी
राजीव गांधी के निधन के बाद सोनिया गांधी ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। वह अपने परिवार और निजी जीवन पर केंद्रित रहीं। बाद में परिस्थितियों ने उन्हें राजनीति में आने के लिए मजबूर किया।
सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली और पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाली नेताओं में शामिल हुईं। उनके राजनीतिक जीवन का एक अहम अध्याय वह भी रहा, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के सत्ता में आने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया।
आने वाली किताब में उनके राजनीतिक फैसलों के साथ-साथ उनके पीछे छिपी व्यक्तिगत परिस्थितियों और सोच पर भी प्रकाश पड़ने की उम्मीद है।
‘Belonging’ सिर्फ राजनीति की किताब नहीं
सोनिया गांधी की इस किताब की सबसे खास बात यही है कि यह केवल उनके राजनीतिक सफर का दस्तावेज नहीं है। इसमें एक ऐसी महिला की कहानी दिखाई देती है, जिसने इटली के छोटे शहर से अपना सफर शुरू किया, भारत आई, एक राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनी, पति और सास को खोया और बाद में खुद भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हुई।
प्रकाशक के अनुसार, किताब में पहचान, कर्तव्य, परिवार और ‘घर’ जैसे सवालों पर भी सोनिया गांधी के विचार सामने आएंगे। वह भारत में पिछले छह दशकों के सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को भी अपने निजी अनुभवों के नजरिए से देखेंगी।
राहुल गांधी के संदेश ने फिर चर्चा में ला दी निजी कहानी
राजीव गांधी की जयंती पर राहुल गांधी का संदेश ऐसे समय आया है, जब सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सार्वजनिक क्षेत्र में उत्सुकता है। राहुल के भावुक शब्दों ने इस किताब को केवल एक पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की राजनीतिक कहानी के बजाय एक मां, पत्नी और परिवार की सदस्य के रूप में सोनिया गांधी के निजी सफर के रूप में देखने का नया भावनात्मक नजरिया दिया है।
अब 10 नवंबर को किताब के प्रकाशित होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सोनिया गांधी अपने जीवन के किन अनकहे पहलुओं, राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते और गांधी परिवार की त्रासदियों को किस तरह अपनी नजर से सामने रखती हैं।



