छत्तीसगढ़

सुकमा में शिक्षा की नई तस्वीर: दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र NEET और IIT में बना रहे पहचान, शाला प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ भव्य स्वागत…

सुकमा। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला सुकमा जिला अब शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। जिले के दूर-दराज़ और आदिवासी इलाकों के विद्यार्थी अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर NEET और IIT जैसी देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं। इसी सकारात्मक बदलाव के बीच नए शिक्षा सत्र की शुरुआत उत्साह और उमंग के साथ हुई। जिला मुख्यालय स्थित शबरी ऑडिटोरियम में आयोजित जिलास्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर, माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर आत्मीय स्वागत किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी ने की। इस दौरान बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को शिक्षा के महत्व तथा राज्य सरकार की विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

शिक्षा से बदल रहा है सुकमा का भविष्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी ने कहा कि आज सुकमा तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है और इस परिवर्तन का सबसे मजबूत आधार शिक्षा है।

उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ाई करने का आह्वान करते हुए कहा कि हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें, अपने पैरों पर खड़े हों और समाज तथा देश की सेवा करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो बच्चों के जीवन में स्थायी परिवर्तन ला सकती है।

दूरस्थ गांवों के छात्र भी पहुंच रहे हैं NEET और IIT

कार्यक्रम में कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि सुकमा के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थी अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जिले के कई छात्र-छात्राएं NEET और IIT जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं, जो पूरे जिले के लिए गर्व की बात है।

कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके तहत—

  • निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग,
  • आधुनिक पुस्तकालय,
  • अध्ययन सामग्री,
  • शैक्षणिक मार्गदर्शन,
  • तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब विद्यार्थियों की सफलता के रूप में सामने आने लगा है।

सरस्वती साइकिल योजना से छात्राओं को मिली नई उड़ान

शाला प्रवेशोत्सव के दौरान सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत कक्षा 9वीं से 12वीं तक की 30 छात्राओं को निःशुल्क साइकिल वितरित की गई।

इस योजना का उद्देश्य दूर-दराज़ क्षेत्रों की छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा प्रदान करना तथा उनकी शिक्षा को निरंतर बनाए रखना है।

नवप्रवेशित बच्चों को मिली अध्ययन सामग्री

प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश लेने वाले बच्चों को कार्यक्रम में—

  • स्कूल बैग,
  • पाठ्यपुस्तकें,
  • गणवेश,
  • स्टेशनरी सामग्री

वितरित की गई, ताकि आर्थिक कारणों से किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो।

‘कबाड़ से जुगाड़’ प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई ‘कबाड़ से जुगाड़’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई।

इस प्रदर्शनी में बच्चों ने बेकार वस्तुओं से उपयोगी मॉडल और वैज्ञानिक उपकरण तैयार कर अपनी रचनात्मकता और नवाचार क्षमता का परिचय दिया। उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।

शिक्षा को लेकर जिला प्रशासन का संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर जिला प्रशासन की ओर से मुख्य अतिथि रूप सिंह मंडावी का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिले में शिक्षा से जुड़ी सभी शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।

बड़ी संख्या में शामिल हुए जनप्रतिनिधि और विद्यार्थी

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मंगम्मा सोयम, जिला पंचायत उपाध्यक्ष महेश कुंजाम, नगर पालिका अध्यक्ष हूंगाराम मरकाम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकुंद ठाकुर, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

मुख्य बातें

  • सुकमा में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत शाला प्रवेशोत्सव के साथ हुई।
  • नवप्रवेशित बच्चों का तिलक, माला और स्वागत सामग्री देकर अभिनंदन किया गया।
  • जिले के दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र अब NEET और IIT जैसी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं।
  • 30 छात्राओं को सरस्वती साइकिल योजना के तहत निःशुल्क साइकिलें वितरित की गईं।
  • बच्चों को स्कूल बैग, किताबें, गणवेश और स्टेशनरी सामग्री भी दी गई।
  • जिला प्रशासन निःशुल्क कोचिंग, आधुनिक पुस्तकालय और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
  • ‘कबाड़ से जुगाड़’ प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और नवाचार क्षमता को प्रदर्शित किया।

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