
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री यानी कृषि-वानिकी को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इसी पहल का सफल उदाहरण बालोद जिले के किसान अनिल जाजू की प्रेरणादायी सफलता के रूप में सामने आया है।
नवा रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ग्राम पलारी, तहसील गुरूर निवासी किसान अनिल जाजू को उनकी निजी भूमि पर तैयार किए गए सागौन वृक्षों के एवज में 9.69 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि का चेक सौंपा।
एग्रोफॉरेस्ट्री से किसानों को मिल रही नई राह
इस मौके पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के जोखिम से बाहर निकालने के लिए वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली अपनाने हेतु प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि एग्रोफॉरेस्ट्री किसानों के लिए दीर्घकालिक और सुरक्षित आय का मजबूत माध्यम बन रही है।

उन्होंने बताया कि “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के जरिए जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिल रही है।
24 साल बाद मिला मेहनत का फल
किसान अनिल जाजू ने वर्ष 2001 में अपनी 3.35 हेक्टेयर निजी भूमि पर सागौन के पौधे लगाए थे। करीब 24 वर्षों तक संरक्षण और देखरेख के बाद वर्ष 2025 में उन्होंने वृक्ष कटाई नियम 2022 के तहत अनुमति लेकर सागौन वृक्षों की कटाई कराई।
वन विभाग की निगरानी में कुल 173 सागौन वृक्षों की कटाई की गई, जिससे 949 नग लकड़ी प्राप्त हुई। इसका कुल आयतन 33.24 घनमीटर दर्ज किया गया। वन विभाग द्वारा निर्धारित दर पर लकड़ी खरीदी गई और लगभग 9.69 लाख रुपए की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कराई गई।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक समृद्धि
अनिल जाजू की सफलता यह साबित करती है कि योजनाबद्ध तरीके से किया गया वृक्षारोपण किसानों के लिए भविष्य की सुरक्षित पूंजी बन सकता है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ प्रदेश के हरित आवरण में भी वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक एग्रोफॉरेस्ट्री मॉडल जलवायु परिवर्तन से मुकाबले, जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाता है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण करने वाले किसानों को पौधों के चयन, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहायता लगातार उपलब्ध करा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाकर अपनी जमीन को लाभकारी बना सकें।



