छत्तीसगढ़ विधानसभा में धान खरीदी पर बवाल, कांग्रेस विधायकों का हंगामा और स्वमेव निलंबन….

रायपुर। बजट सत्र के चौथे दिन शून्यकाल के दौरान धान खरीदी का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। विपक्ष ने राज्य सरकार की नीति को विफल बताते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया और इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
जब सभापति ने स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य (नामंजूर) कर दिया, तो कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के गर्भगृह (वेल) में पहुंच गए। नियमों के तहत वेल में आने पर सदस्य स्वमेव निलंबित हो गए।
🌾 नेता प्रतिपक्ष का आरोप: “सरकार की नीति फेल”
नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा:
- धान खरीदी की नीति पूरी तरह असफल रही।
- किसानों को पहले दिन से ही “चोर” की तरह देखा गया।
- टोकन प्रणाली के नाम पर किसानों को परेशान किया गया।
- कई किसानों का पूरा धान नहीं खरीदा गया।
- स्थिति अंग्रेजों के जमाने से भी बदतर रही।
उन्होंने कहा कि यह किसानों से जुड़ा गंभीर विषय है और इस पर विस्तृत चर्चा जरूरी है।

🗣️ कांग्रेस विधायकों ने रखे अपने-अपने आरोप
विपक्ष के कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों के उदाहरण देते हुए सरकार पर निशाना साधा:
- उमेश पटेल: किसानों का कर्ज माफ किया जाए या दोबारा खरीदी की जाए।
- संगीता सिन्हा: किसानों को धान “समर्पण” कराने के लिए मजबूर किया गया।
- राघवेंद्र सिंह: जांजगीर में किसानों को प्रताड़ित होना पड़ा, एक किसान ने जहर पी लिया, एक को टॉवर पर चढ़ना पड़ा।
- ब्यास कश्यप: जांजगीर में सिर्फ 93% किसानों का धान खरीदा गया, कई पर एफआईआर दर्ज हुई।
- द्वारिकाधीश यादव: धान और किसान का मुद्दा प्रदेश के हित से जुड़ा है।
- रामकुमार यादव: किसानों को डराने पुलिस भेजी गई।
- बालेश्वर साहू: जिन किसानों का धान नहीं बिका, उनकी खरीदी होनी चाहिए।
- विक्रम मंडावी: बस्तर से सरगुजा तक किसान परेशान हैं।
- भोलाराम साहू: कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या को मजबूर।
- अंबिका मरकाम: सिहावा क्षेत्र के किसान बेहद परेशान।
- कुँवर सिंह निषाद: पूर्व विधायक को भी धान बेचने धरना देना पड़ा।
- यशोदा वर्मा: खैरागढ़ में एक किसान ने आत्महत्या की कोशिश की।
- ओंकार साहू: धमतरी में रकबा समर्पण से किसानों की हालत खराब।
- हर्षिता स्वामी बघेल: डोंगरगढ़ के कई किसान धान नहीं बेच पाए।
- अटल श्रीवास्तव: सरकार किसानों को हतोत्साहित कर रही है।
🔥 भूपेश बघेल का सीधा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा:
- सरकार धान और किसान पर चर्चा से बचना चाहती है।
- प्रदेश में “अधिकारी राज” चल रहा है।
- किसानों के घर और खलिहान में जबरन प्रवेश किया गया।
- टोकन मांगने पर किसानों के घर अधिकारी भेजे गए।
- किसानों को चोर समझा गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके घर में भी अधिकारी “बलात तरीके” से घुसे थे।
उन्होंने मांग की कि यदि चर्चा नहीं कराई जा रही है, तो कम से कम सरकार जवाब दे।
⚖️ सभापति का निर्णय और हंगामा
सभापति ने कहा कि बजट सत्र में मुख्य रूप से आय-व्यय (बजट) पर चर्चा होती है, इसलिए स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
निर्णय के बाद विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। नियमों के अनुसार वेल में जाने वाले सदस्य स्वतः (स्वमेव) निलंबित माने जाते हैं।
📌 राजनीतिक संदेश
- धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
- विपक्ष इसे किसान विरोधी नीति बताकर सरकार को घेर रहा है।
- सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब अभी सामने नहीं आया है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है, खासकर तब जब बजट पर चर्चा आगे बढ़ेगी।



