मार्च 2026 लक्ष्य: अमित शाह की हाईलेवल बैठक, नक्सल नेटवर्क तोड़ने पर बड़ा प्लान…

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में रायपुर में नक्सल प्रभावित राज्यों के वरिष्ठ पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वामपंथी उग्रवाद (LWE), छत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा रणनीति और विकास कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रगति हासिल करना और प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है।

नक्सल नेटवर्क तोड़ने और सुरक्षा रणनीति पर फोकस
बैठक में नक्सलियों के नेटवर्क को कमजोर करने और उनके संगठनात्मक ढांचे को तोड़ने के लिए नई रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि वे नक्सलियों के मूवमेंट, सप्लाई चेन और संपर्क तंत्र पर कड़ी निगरानी रखें। साथ ही, खुफिया तंत्र को और मजबूत करने तथा संयुक्त ऑपरेशन को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
नक्सलियों के सरेंडर को बढ़ावा देने पर जोर
गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए आत्मसमर्पण (सरेंडर) नीति को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जाए। इससे नक्सल संगठन कमजोर होंगे और क्षेत्र में शांति स्थापित होगी।
नक्सल प्रभावित गांवों में विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर चर्चा
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि केवल सुरक्षा कार्रवाई से ही नक्सलवाद समाप्त नहीं होगा, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य करना भी जरूरी है। इसके तहत सड़क, बिजली, मोबाइल नेटवर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य है कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
बस्तर को आदिवासी संभाग बनाने पर भी विचार
नया रायपुर में आयोजित इस बैठक में बस्तर को आदिवासी संभाग के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना और आदिवासी समुदाय के विकास को प्राथमिकता देना है। इससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर प्रशासन की पहुंच बढ़ेगी।
कई केंद्रीय और राज्य स्तरीय अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह सचिव, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक, गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के महानिदेशक और छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, झारखंड और तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक भी बैठक में मौजूद रहे।
सुरक्षा और विकास दोनों पर समान फोकस
बैठक में यह रणनीति बनाई गई कि नक्सलवाद के खिलाफ “सिक्योरिटी और डेवलपमेंट” दोनों मोर्चों पर एक साथ काम किया जाएगा। सुरक्षा बलों के ऑपरेशन जारी रहेंगे, वहीं दूसरी ओर विकास कार्यों को तेज कर स्थानीय लोगों का विश्वास जीता जाएगा।
मार्च 2026 तक ठोस परिणाम का लक्ष्य
गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में ठोस और निर्णायक परिणाम सामने आने चाहिए। सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को हिंसा मुक्त बनाकर वहां स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना है।
यह बैठक छत्तीसगढ़ सहित देश के सभी नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे आने वाले समय में नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और विकास कार्यों की दिशा तय होगी।



