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सहायक शिक्षक सीधी भर्ती विवाद: कोर्ट के आदेशों में उलझी सरकार, नई भर्ती परीक्षा ही बन सकती है समाधान

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक की सीधी भर्ती को लेकर उपजा विवाद अब एक जटिल कानूनी और प्रशासनिक संकट का रूप ले चुका है। एक तरफ अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर न्यायालय के आदेशों के कारण राज्य सरकार की स्थिति सीमित हो गई है। ऐसे हालात में यह सवाल उठ रहा है कि सरकार के पास अब विकल्प क्या बचे हैं

भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत और परीक्षा परिणाम

पूरा मामला 4 मई 2023 से शुरू हुआ, जब स्कूल शिक्षा विभाग ने सहायक शिक्षक के 6285 पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया। इसके बाद व्यापम ने 1 जुलाई 2023 को परीक्षा परिणाम घोषित किया, जिसकी वैधता अवधि एक वर्ष निर्धारित थी।

इस दौरान यह स्पष्ट है कि बीएड डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को बाहर रखने को लेकर न तो सर्वोच्च न्यायालय और न ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की ओर से कोई निर्देश जारी किया गया था।

चरणबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया

सीधी भर्ती–2023 के तहत सहायक शिक्षक पद के पहले चार चरणों की नियुक्ति प्रक्रिया चली।

  • 8 सितंबर 2023 को पहली बार कटऑफ रैंक में शामिल अभ्यर्थियों की सूची विभागीय वेबसाइट पर जारी हुई।
  • 4 मार्च 2024 को चौथे चरण की सूची जारी की गई।

इन चार चरणों तक विभाग कुल 5301 सहायक शिक्षकों की नियुक्ति कर चुका था, जिनमें 2621 बीएड अर्हताधारी अभ्यर्थी शामिल थे।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इसके बाद 2 अप्रैल 2024 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए बीएड डिग्रीधारियों को सहायक शिक्षक पद के लिए अपात्र घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद

  • आगामी चरणों की भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई
  • पहले से नियुक्त बीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े हो गए

चयन सूची की वैधता और विस्तार

सीधी भर्ती 2023 के परीक्षा परिणामों की मूल वैधता 1 जुलाई 2024 को समाप्त हो गई। बाद में 24 फरवरी 2025 को उच्च न्यायालय के आदेश के तहत चयन सूची की वैधता 1 जुलाई 2025 तक बढ़ाई गई

पांचवें चरण की भर्ती

हाईकोर्ट के 2 अप्रैल 2024 के आदेश के पालन में विभाग ने मार्च–अप्रैल 2025 में सहायक शिक्षक भर्ती का पांचवां चरण पूरा किया।

  • सेवा से हटाए गए 2621 बीएड अभ्यर्थियों के स्थान पर
  • 2615 डीएड अर्हताधारी अभ्यर्थियों को शामिल किया गया

हालांकि इसमें से

  • 1316 अभ्यर्थी दस्तावेज सत्यापन में शामिल नहीं हुए या अपात्र पाए गए
  • शेष 1299 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए

छठवें चरण को लेकर विवाद

अब सबसे अहम बात यह है कि चयन सूची की विस्तारित वैधता 1 जुलाई 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके बाद भी कुछ अभ्यर्थी छठवें चरण की सूची जारी करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ये अभ्यर्थी मेरिट में निचले क्रम पर हैं, जिस कारण उन्हें अब तक नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पाया।

न्यायालय से भी नहीं मिली राहत

इस मुद्दे पर आंदोलनरत अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं को भी न्यायालय ने खारिज कर दिया है। यानी कानूनी रूप से सरकार अब नई सूची जारी करने के लिए बाध्य नहीं है और न ही ऐसा कर सकती है।

सरकार के सामने अब क्या विकल्प?

मौजूदा हालात में सरकार के हाथ कानूनी रूप से बंधे हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का एकमात्र व्यावहारिक समाधान यह हो सकता है कि—

  • नई सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए
  • नई भर्ती परीक्षा आयोजित की जाए
  • जिसमें पुराने और नए दोनों अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले

इससे न केवल वर्षों से चले आ रहे विवाद का अंत होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में रिक्त पदों को भी कानूनी और पारदर्शी तरीके से भरा जा सकेगा

कुल मिलाकर, सहायक शिक्षक सीधी भर्ती विवाद अब आंदोलन से अधिक नीति और कानूनी निर्णय का विषय बन चुका है, जहां सरकार को न्यायालय के दायरे में रहते हुए ही आगे का रास्ता निकालना होगा।

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