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दिसंबर 2025 में GST कलेक्शन: राहत तो मिली, लेकिन तस्वीर पूरी तरह मजबूत नहीं

दिसंबर 2025 में सरकार को GST से करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये की आमदनी हुई। यह आंकड़ा पिछले साल दिसंबर से थोड़ा ज्यादा है, इसलिए इसे सरकार के लिए एक राहत माना जा रहा है।
हालांकि, इस कलेक्शन के पीछे घरेलू बाजार की मजबूती नहीं, बल्कि आयात (बाहर से आने वाले सामान) की बड़ी भूमिका रही।


घरेलू खर्च अभी भी सुस्त

देश के अंदर होने वाले लेन-देन से दिसंबर में करीब 1.22 लाख करोड़ रुपये GST मिला।
यह आंकड़ा उम्मीद से कमजोर माना जा रहा है, क्योंकि त्योहारों और साल के अंत के बावजूद लोगों की खरीदारी में तेज़ी नहीं दिखी

👉 इसका मतलब है कि

  • उपभोक्ता खर्च अभी दबाव में है
  • मांग पूरी तरह रफ्तार नहीं पकड़ पा रही
  • महंगाई और अनिश्चितता का असर बाजार पर बना हुआ है

आयात ने संभाला GST कलेक्शन

दूसरी ओर, आयात से मिलने वाला GST करीब 52 हजार करोड़ रुपये रहा।
यानी जो कमी घरेलू खर्च से आई, उसे विदेश से आने वाले सामानों पर लगे टैक्स ने काफी हद तक पूरा कर दिया।

👉 साफ शब्दों में कहें तो
GST कलेक्शन का सहारा घरेलू बाजार नहीं, बल्कि आयात बना।


रिफंड ज्यादा, नेट कमाई सीमित

दिसंबर में सरकार ने करीब 29 हजार करोड़ रुपये GST रिफंड के रूप में वापस किए।
रिफंड के बाद सरकार के पास नेट GST कलेक्शन करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये ही बचा।

  • यह बढ़ोतरी जरूर है
  • लेकिन इसे मजबूत उछाल नहीं कहा जा सकता

सेस से कमाई में बड़ी गिरावट

एक अहम चिंता का विषय सेस कलेक्शन में तेज गिरावट है।

  • दिसंबर 2024 में सेस से: 12,000 करोड़ रुपये
  • दिसंबर 2025 में सेस से: करीब 4,000 करोड़ रुपये

👉 इसकी वजह:

  • सेस अब सिर्फ तंबाकू जैसे चुनिंदा उत्पादों पर ही लगाया जा रहा है
  • कई वस्तुओं से सेस हटाया गया है

पूरे वित्त वर्ष की तस्वीर बेहतर

अगर अप्रैल से दिसंबर 2025 तक का आंकड़ा देखें, तो स्थिति ज्यादा संतोषजनक दिखती है।

  • इस अवधि में GST से करीब 16.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए
  • यह पिछले साल की तुलना में ज्यादा है
  • पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में GST ने 22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रिकॉर्ड बनाया था

👉 यानी लंबे समय में GST सिस्टम मजबूत हुआ है, लेकिन कुछ महीनों में सुस्ती दिख रही है।


टैक्स कटौती का असर दिखना स्वाभाविक

सितंबर 2025 में सरकार ने

  • करीब 375 वस्तुओं पर GST घटाया
  • आम लोगों को महंगाई से राहत मिली

लेकिन इसका सीधा असर

  • सरकार की टैक्स कमाई पर पड़ा
  • GST और सेस दोनों के आंकड़े दबाव में आए

आगे क्या उम्मीद?

विशेषज्ञों का मानना है कि

  • यह सुस्ती अस्थायी है
  • जैसे ही बाजार में मांग बढ़ेगी
  • उद्योग और उपभोक्ता खर्च रफ्तार पकड़ेगा
  • GST कलेक्शन भी दोबारा मजबूत हो सकता है

निष्कर्ष

👉 दिसंबर में सरकार को राहत जरूर मिली,
👉 लेकिन घरेलू खर्च की कमजोरी साफ नजर आई,
👉 आयात और पिछले सुधारों के दम पर ही GST संभल पाया।

असली सुधार तब माना जाएगा जब देश के अंदर खपत बढ़ेगी और बाजार खुद रफ्तार पकड़ेगा।

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