छत्तीसगढ़
डिप्टी CM विजय शर्मा का सख्त रुख — “2003 में ब्लड रिलेशन का नाम नहीं तो जेल तक होगी कार्रवाई”…

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने क्या कहा — सारांश
विजय शर्मा ने कहा कि SIR (Special Intensive Revision) के गणना पत्र/डेटा 2025 की मतदाता सूची के आधार पर जेनरेट किए जा रहे हैं, और वे 2003 की मतदाता सूची के साथ क्रॉस-चेक कर रहे हैं। उनके मुताबिक जिनका कोई ब्लड-रिलेटिव (परिवार के सदस्य) 2003 की सूची में नहीं मिलता, उन पर आगे सत्यापन होगा; यदि वे “अवैध” पाए गए तो Foreigners Act व संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस बयान का रिपोर्टिंग संस्करण स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित हुआ है।

2) SIR की वर्तमान टाइमलाइन और तरीका (छत्तीसगढ़ के संदर्भ में)
- छत्तीसगढ़ में गणना-चरण (Enumeration / घर-घर गणना प्रपत्र वितरण) 4 नवम्बर — 4 दिसंबर 2025 के बीच चलाया जा रहा है; मसौदा मतदाता सूची 9 दिसंबर को प्रकाशित होने का समय-सूचना (और दावों/आपत्तियों की अवधि बाद में)। BLO (बूथ-स्तरीय अधिकारी) घर-घर फॉर्म दे रहे हैं और डिजिटाइजेशन भी चल रहा है।
3) क्या “Foreigners Act” किसी भी नागरिक पर लागू हो सकती है? (कानूनी वास्तविकता)
- Foreigners Act (1946 / संबंधित नियमन) का लक्ष्य उन लोगों पर लागू करना है जो भारतीय नागरिक नहीं हैं — यानी परिभाषा के अनुसार “foreigner = वह व्यक्ति जो भारत का नागरिक नहीं है”। इसलिए केवल किसी भारतीय पर बिना अतिरिक्त सबूत सीधे-सीधे Foreigners Act लागू कर देने का सीधा अर्थ नहीं बनता; पहले यह तय करना होगा कि व्यक्ति नागरिक है या नहीं और उसके बाद ही विदेशी/अवैध निवास का प्रश्न उठेगा। (सरकारी अधिनियम का टेक्स्ट और MHA/नियम इसी बात की पुष्टि करते हैं).
संक्षेप: प्रशासनिक बयान में कड़े फ़ैसलों-की धमकी दी जा सकती है, पर कानूनी प्रक्रिया — पहचान → नागरिकता निर्धारण → अगर कोई विदेशी पाया गया तो Foreigners Act/डिपोर्टेशन-प्रक्रिया — यह तय कानून और प्रक्रियाओं के अनुसार होगी।
4) अगर किसी का नाम 2003 की सूची में नहीं है — क्या वैकल्प है?
- Election Commission/प्रत्येक राज्य के चुनाव कार्यालयों ने पहले ही कहा है कि जिनके नाम 2003 की सूची में नहीं हैं, उनके पास वैकल्प (proof) के तौर पर माता-पिता के नाम, जन्म-दस्तावेज़ या अन्य वैध पहचान-दस्तावेज़ पेश करने का विकल्प दिया जा सकता है — यानी “ना होने पर तुरंत पकड़” जैसा सख्त परिणाम हमेशा नहीं आता; ECI ने ऐसी छूट/मार्गदर्शन पहले जारी किए हैं। अगर रोक-टोक या जटिलता हो तो यह विवाद-विषय अदालतों तक भी पहुंच चुका/सकता है।
5) SIR पर बढ़ी चिंताएँ और स्थानीय प्रतिक्रियाएँ
- BLO-स्तर पर कार्यभार और समय-सीमा को लेकर शिकायतें आ रही हैं; प्रदेश PCC/राजनीतिक दलों और कुछ स्थानीय संगठनों ने समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है, साथ ही कुछ संगठनों ने SIR की विधिक वैधता पर भी सवाल उठाए हैं — और कुछ SIR-कार्यों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई/चुनौतियाँ रही हैं।
6) यदि आप/आपका परिवार प्रभावित है — तत्काल क्या करें (प्रैक्टिकल गाइड)
- गणना-प्रपत्र (Enumeration form) तुरंत भरें — फॉर्म में दिए विकल्पों के अनुसार parents/guardian का नाम, जन्मस्थान आदि भरें। (अधिकारिक CEO/ECI पोर्टल से ऑनलाइन भरने का विकल्प भी उपलब्ध है)।
- दस्तावेज़ संजोकर रखें — जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, राशन कार्ड, आधार, पासपोर्ट (यदि हो), पुराने वोटर-ID, माता-पिता के वोटर-एग्ज़्ट्रैक्ट आदि। ये 2003-के-बाहरी लोगों के लिए सहायक-सबूत हो सकते है
- BLO/प्रशासन से संपर्क — अपने लोकल BLO से मिलने/फोन/ई-मेल कर के स्पष्ट करें कि आप भारतीय नागरिक हैं और किस दस्तावेज़ से यह सिद्ध होगा; आवश्यक हो तो लिखित आवेदन/सबूत सौंपें। CEO कार्यालय/हेल्पलाइन का उपयोग करें।
- अगर नोटिस/आधिकारिक कार्रवाई आती है तो अलग-से कानूनी मदद लें — दाखिल किये गए नोटिस/आदेश की प्रति रखें; नागरिकता/वोटर-रोल-मामलों पर अनुभवी वकील से संपर्क करना बुद्धिमानी होगी। (कानूनी कठिनाइयों में कोर्ट-राह की संभावना रहती है।)
7) समग्र निष्कर्ष — क्या ख़ास सावधानी रखें
- बयान राजनीतिक-कठोर है — सरकार/स्थानीय नेताओं के बयान अक्सर कड़े होते हैं; पर कानूनी प्रक्रिया और प्रवर्तन सीधे-सीधे बिना पहचान/सबूत के नहीं हो सकती। Foreigners Act केवल उन पर लागू होगा जो भारत के नागरिक नहीं पाए जाते।
- यदि आपका/किसी परिचित का नाम 2003 की सूची में नहीं है — घबराएँ नहीं: चुनाव आयोग ने कुछ वैकल्पिक सबूत-विधियाँ रखी हैं; सबसे पहले गणना-प्रपत्र भरकर और BLO/CEO से सम्पर्क करके अपने दस्तावेज़ जमा कर दें।



