छत्तीसगढ़
DGP-IGP कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन: PM मोदी और अमित शाह की मौजूदगी में 12 घंटे की मैराथन बैठक शुरू….

डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस — क्या है
- इस सम्मेलन में देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक (DGP) और पुलिस महानिरीक्षक (IGP) शामिल होते हैं, साथ ही केंद्रीय पुलिस संगठनों, इंटेलिजेंस एजेंसियों, गृह मंत्रालय आदि के शीर्ष अधिकारी भी।
- यह एक राष्ट्रीय स्तरीय वार्षिक (पहले कभी–कभी बाई-एnnual) बैठक है, जिसमें कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, उभरती चुनौतियाँ, आधुनिक पुलिसिंग तकनीक, सुधार, नीति, साझा अनुभव आदि पर खुलकर बातचीत होती है।
- सम्मेलन का उद्देश्य है “विकसित भारत: सुरक्षा आयाम” (या इसी से मिलती-जुलती थीम) के अंतर्गत — यानी जैसे आर्थिक व सामाजिक विकास हो रहा है, उसी के अनुरूप देश की सुरक्षा व पुलिस रणनीतियाँ भी अपडेट होनी चाहिए। 2025 के इस संस्करण का यही थीम है।

📜 इतिहास — शुरुआत से अब तक
- सबसे पहली बार इस तरह की “IGPs/Police Chiefs” सम्मेलन की शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई थी — 1920 में। बाद में, आज़ादी के बाद, 12 जनवरी 1950 को (स्वतंत्र भारत में) इसे पुनर्स्थापित किया गया था; उस समय उद्घाटन किया था पहले गृह मंत्री Sardar Vallabhbhai Patel
- 1973 के बाद इसे नियमित रूप से — यानी सालाना (annual) — आयोजित किया जाने लगा।
- 2014 के बाद, पुराने चलन से हटकर, इसे सिर्फ दिल्ली में नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित करने की परंपरा शुरू हुई। यह बदलाव हुआ ताकि पुलिस-सुरक्षा से जुड़े रूपों को देश के अलग-अलग हिस्सों में समझा जाए और स्थानीय चुनौतियाँ, हालात, रणनीतियाँ सुनी जाएँ।
- इसलिए अब तक ये सम्मेलन कई प्रदेशों में हो चुके हैं — असम (दिसपुर), गुजरात (कच्छ), तेलंगाना (हैदराबाद), मध्य प्रदेश (टेकनपुर), केवड़िया (गुजरात), महाराष्ट्र (पुणे), उत्तर प्रदेश (लखनऊ), ओडिशा (भुवनेश्वर) आदि।
इस साल 2025 में, यह तीसरी दफ़ा है कि यह सम्मेलन दिल्ली/परंपरागत जगहों से हटकर किसी राज्य — इस बार Raipur (छत्तीसगढ़) — में हो रहा है। छत्तीसगढ़ पहली बार इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
🎯 इस साल (2025) की विशेषताएँ — 60वाँ सम्मेलन
- इस बार सम्मेलन का विषय है “विकसित भारत: सुरक्षा आयाम” — यानी राष्ट्रीय विकास के साथ सुरक्षा और कानून व्यवस्था की बलियदारी।
- सम्मेलन के एजेंडा में शामिल हैं: वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद), आतंकवाद निरोध, आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का पुलिसिंग में उपयोग, साइबर सुरक्षा आदि।
- इस सम्मेलन में भाग लेने वाले — सिर्फ DGP/IGP नहीं, बल्कि केंद्रीय पुलिस संगठन, इंटेलिजेंस, गृह मंत्रालय, राज्य गृह विभाग, D.I.G./SP स्तर के अधिकारी भी — ताकि विविध स्तरों पर बातचीत और अनुभव साझा हो सके।
- इस दफ़ा, लक्ष्य में बताया गया है कि वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) को पूरी तरह समाप्त करना — एक राष्ट्रीय लक्ष्य, जिसे 31 मार्च 2026 तक हासिल करने की सरकार की प्रतिबद्धता है।
- साथ ही, पुलिसिंग में आधुनिकता — तकनीक, फॉरेंसिक, इंटर-एजेंसी तालमेल — पर जोर। यानी सिर्फ “हथियार + बल” नहीं, बल्कि “बुद्धिमत्ता + प्रोफेशनलिज्म + आधुनिक अभियुक्ति” से काम करना।
- और — जैसा आपने लिखा — इस बार सम्मेलन में प्रदेश-विशिष्ट रणनीतियाँ भी सामने आएंगी। जैसे कि छत्तीसगढ़ के DGP द्वारा “बस्तर 2.0” का प्रस्ताव, जिसमें नक्सलवाद के खात्मे के बाद विकास, पुनर्निर्माण, सुरक्षा और प्रशासन की रणनीति शामिल होगी। यह स्थानीय (state-level) मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर लाने का अवसर है।
🧑💼 क्यों महत्वपूर्ण है — मतलब क्या हो सकता है जनता और देश के लिए
- यह सम्मेलन दरअसल उन नीति-निर्माण बैठकों में से है, जहाँ देश की आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, नक्सलवाद/आतंकवाद जैसी चुनौतियों का भविष्य-दृष्टिकोण तय होता है।
- जब पुलिस व सुरक्षा एजेंसाओं के शीर्ष अधिकारी देश भर से एक साथ आते हैं, तो बेहतर समन्वय (inter-state coordination), आधुनिक रणनीतियों का साझा अनुभव, नई चुनौतियों के लिए योजना बनाना संभव होता है — जिससे कानून-व्यवस्था और बेहतर हो सकती है।
- तकनीक, फॉरेंसिक, साइबर सुरक्षा, AI आदि जैसे आधुनिक उपकरणों/प्रक्रियाओं पर जोर, पुलिसिंग व्यवस्था को “21वीं सदी की चुनौतियों” के अनुरूप बनाता है — जो सिर्फ बल (man-power) से नहीं, बुद्धिमत्ता व आधुनिकता से होगी।
- स्थानीय (state / district / zone) स्तर की चुनौतियों — जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास, पुनर्निर्माण, सुरक्षा-प्रबंधन, सामुदायिक सशक्तिकरण — भी राष्ट्रीय योजना के हिस्से बन सकते हैं। इससे सिर्फ दमन नहीं, बल्कि दीर्घकालीन स्थायित्व, विकास व सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है।
- अंततः — जितना विकास, उतनी जिम्मेदारी: “विकसित भारत” के साथ “सुरक्षित भारत” होना चाहिए, ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा और देश की आंतरिक स्थिरता बनी रहे।
✅ संक्षेप में
- 60th All‑India DGP–IGP Conference देश का वह प्रमुख सुरक्षा-संबंधित राष्ट्रीय मंच है, जहाँ पुलिस और सुरक्षा से जुड़ी उच्च-स्तरीय नीतियाँ तय होती हैं।
- इसकी नींव 1950 में रखी गई थी; 2014 के बाद इसे दिल्ली से बाहर विभिन्न राज्यों में आयोजित किया जाने लगा।
- 2025 में यह पहली बार छत्तीसगढ़ (Naya Raipur, रायपुर) में हो रहा है।
- एजेंडा में नक्सलवाद, आतंकवाद, महिला सुरक्षा, आधुनिक पुलिसिंग (फॉरेंसिक, AI, साइबर), आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा जैसे विषय हैं।
- यह सिर्फ “पुलिस-मुलाकात” नहीं — बल्कि “भारत की सुरक्षा, स्थिरता और भविष्य की रणनीति” तय करने वाला प्लेटफार्म है।



