माता सावित्री बाई फुले जयंती: शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण को किया गया नमन

देश की प्रथम महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक माता सावित्री बाई फुले की जयंती के अवसर पर जिले के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा के साथ कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान उनके चित्र पर माल्यार्पण कर शिक्षा, सामाजिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक योगदान को स्मरण किया गया।

शिक्षा की अलख जगाने वाली अग्रदूत
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि माता सावित्री बाई फुले ने उस दौर में शिक्षा की मशाल जलाई, जब लड़कियों और दलित वर्ग को पढ़ाना सामाजिक अपराध माना जाता था। उन्होंने न केवल देश की पहली बालिका पाठशाला की स्थापना की, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों, जातिवाद और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ भी मुखर आवाज उठाई।
शिक्षा को बनाया सामाजिक परिवर्तन का हथियार
वक्ताओं ने बताया कि माता सावित्री बाई फुले ने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर महिलाओं, शोषितों और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोले। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के दौरान उन्हें सामाजिक विरोध, अपमान और अत्याचारों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे अपने संकल्प और विचारों से कभी पीछे नहीं हटीं।
महिला सशक्तिकरण की अमिट प्रेरणा
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि आज जब महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और सामाजिक न्याय की बात होती है, तब माता सावित्री बाई फुले का जीवन प्रेरणास्रोत बनकर सामने आता है। उनका संघर्ष और विचारधारा आज की पीढ़ी को समानता, न्याय और शिक्षा के महत्व का संदेश देती है।



