वेनेजुएला के बाद डोनाल्ड ट्रंप का भारत पर सख्त रुख, रूसी तेल खरीद को लेकर दी टैरिफ बढ़ाने की खुली चेतावनी

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। तेल-समृद्ध देश वेनेजुएला पर कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर और सख्त नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में अब ट्रंप ने भारत को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने रूसी तेल (Russian Oil) की खरीद को लेकर भारत पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि अगर भारत उनकी बात नहीं मानता, तो भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया जा सकता है।

“मुझे खुश करना जरूरी” — ट्रंप का बयान
एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि—
“पीएम मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं, लेकिन वे मुझे खुश नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था। मुझे खुश करना ज़रूरी था। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम भारत पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”
ट्रंप का यह बयान भारत के रूस के साथ तेल व्यापार को लेकर आया है, जिसका अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से विरोध करता रहा है।
रूसी तेल मुद्दे पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ संकेत दिए कि अगर नई दिल्ली ‘रूसी तेल मुद्दे’ पर सहयोग नहीं करती, तो अमेरिका भारतीय इंपोर्ट्स पर मौजूदा टैरिफ और बढ़ा सकता है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क रहा है कि—
- रूस तेल व्यापार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में कर रहा है
- भारत रूसी तेल खरीदकर और उसे रिफाइन कर दोबारा बेचने से मुनाफा कमा रहा है
अगस्त 2025 में क्यों लगाया गया था 50% टैरिफ
दरअसल, अगस्त 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। इसके पीछे मुख्य वजह भारत का रूस के साथ तेल व्यापार बताया गया।
इस फैसले के कारण—
- भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील लंबे समय तक अटकी रही
- दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा
अमेरिका की मांग और भारत का रुख
ट्रंप चाहते थे कि भारत—
- अपना बाजार अमेरिका के लिए पूरी तरह खोले
- डेयरी और एग्रीकल्चर सेक्टर में अमेरिकी कंपनियों को एंट्री दे
हालांकि, भारत ने इन मुद्दों पर अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए रुख नहीं बदला, जिससे दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हो गए।
भारत के लिए रूस क्यों अहम
रूस भारत को तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है। सस्ते रूसी कच्चे तेल से—
- भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी होती हैं
- घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण बना रहता है
इसी वजह से भारत ने पश्चिमी दबाव के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखा।
पुतिन पर दबाव की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत पर भारी टैरिफ की धमकी दरअसल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है।
ट्रंप प्रशासन भारत जैसे बड़े खरीदार देशों पर दबाव डालकर रूस की तेल आय सीमित करना चाहता है।
आगे क्या?
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि भारत-अमेरिका संबंधों में एक बार फिर तनाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि—
- भारत अपने ऊर्जा हितों पर कायम रहता है या नहीं
- अमेरिका टैरिफ को लेकर कितना सख्त रुख अपनाता है
फिलहाल ट्रंप का बयान भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।



