सुरक्षाबलों की कार्यवाही से नक्सलियों में हड़कंप! कमांडर ने लिखा लीडर को पत्र – “कहा कोई भी ठिकाना सेफ नहीं”

बीजापुर /दंतेवाड़ा। नक्सली संगठन में मची अफरातफरी का एक और बड़ा सबूत सामने आया है। हाल ही में बीजापुर में हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को एक दो पन्नों का पत्र बरामद हुआ है, जिसे महिला नक्सली कमांडर मोटू नक्सली लीडर मनकी को पत्र लिखा है। इस पत्र में फोर्स के बढ़ते दबाव और संगठन में दहशत का खुलासा किया गया है।

संगठन के लिए ठिकाने सुरक्षित नहीं – पत्र में बड़ा खुलासा
बरामद पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है, जिसमें यह साफ तौर पर जिक्र किया गया है कि अब नक्सली सुरक्षित तरीके से कहीं भी नहीं ठहर सकते। लगातार हो रही सुरक्षाबलों की कार्रवाई के चलते संगठन अपने ठिकाने बदलने को मजबूर है।
डेडलाइन का खौफ, जंगल भी असुरक्षित

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार द्वारा दी गई आत्मसमर्पण की डेडलाइन का असर नक्सलियों पर साफ नजर आ रहा है। हालिया एंड्री मुठभेड़ वाली जगह के अलावा बोडका, गमपुर, डोडीतुमनार और तोड़का के जंगलों को भी असुरक्षित बताया गया है।
लगातार दबाव में नक्सली संगठन
पिछले एक साल से नक्सलियों को लगातार सुरक्षाबलों की कार्रवाई के चलते भागना पड़ रहा है। पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि संगठन के लिए अब कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं बचा और वे छिपने के लिए लगातार नए ठिकाने ढूंढ रहे हैं।
सुरक्षा बलों की रणनीति कारगर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह पत्र नक्सलियों के अंदरूनी संकट और कमजोर होते नेटवर्क का स्पष्ट प्रमाण है। लगातार हो रही मुठभेड़ों और ऑपरेशनों के चलते नक्सली बुरी तरह से बिखर रहे हैं और आत्मसमर्पण की ओर बढ़ रहे हैं।
सरकार और सुरक्षाबलों का बयान
सुरक्षा बलों का कहना है कि यह पत्र यह साबित करता है कि नक्सली संगठनों पर सरकार और फोर्स की रणनीति पूरी तरह से प्रभावी हो रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जा रहा है।
नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता कदम
जानकारों का मानना है कि अगर सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो आने वाले वर्षों में नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो सकता है। बरामद पत्र इस बात का संकेत है कि नक्सली अब न तो संगठित रह पा रहे हैं और न ही सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
