
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाए जाने के विरोध में सोमवार को बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदेशभर से आए विद्युत मीटर रीडर श्रमिक संघ के सदस्य राजधानी रायपुर में एकत्र हुए और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSEB) मुख्यालय का घेराव किया। इस प्रदर्शन को विपक्षी दल कांग्रेस का भी समर्थन मिला।

मीटर रीडरों का कहना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने से हजारों कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि सरकार और बिजली कंपनी ने नई व्यवस्था लागू करने से पहले उनके भविष्य और रोजगार सुरक्षा पर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई है।
प्रदेशभर से पहुंचे मीटर रीडर
प्रदर्शन में रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में मीटर रीडर शामिल हुए। सभी ने विद्युत मीटर रीडर श्रमिक संघ के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और सरकार तथा बिजली विभाग के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे वर्षों से घर-घर जाकर बिजली मीटर की रीडिंग लेने का काम कर रहे हैं, लेकिन स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद उनका काम धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन
प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। रायपुर के डडसेना भवन में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने मीटर रीडरों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को नई तकनीक लागू करने के साथ-साथ कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
मीटर रीडरों ने क्या कहा?
मीटर रीडरों का कहना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू होने के बाद उनकी नौकरी पर सीधा असर पड़ेगा। उनका आरोप है कि सरकार तकनीकी बदलाव तो कर रही है, लेकिन उन कर्मचारियों के पुनर्वास या वैकल्पिक रोजगार की कोई योजना सामने नहीं रखी गई है, जो वर्षों से इस काम से जुड़े हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कई जिलों में महीनों से मानदेय का भुगतान लंबित है। इसके अलावा अलग-अलग जिलों में अलग-अलग दरों से भुगतान किए जाने के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
मीटर रीडर श्रमिक संघ ने सरकार और बिजली कंपनी के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- स्मार्ट मीटर व्यवस्था से प्रभावित सभी मीटर रीडरों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- जब तक प्रभावित कर्मचारियों को वैकल्पिक रोजगार नहीं दिया जाता, तब तक प्रीपेड (रिचार्ज) स्मार्ट मीटर व्यवस्था लागू न की जाए।
- पूरे प्रदेश में मीटर रीडरों के लिए एक समान कार्य नीति और समान भुगतान व्यवस्था लागू की जाए।
- लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
- नई तकनीक लागू करते समय कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट पुनर्वास नीति बनाई जाए।
रोजगार को लेकर बढ़ी चिंता
मीटर रीडरों का कहना है कि तकनीकी बदलाव का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उन कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, जो वर्षों से बिजली विभाग से जुड़े कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन का महत्व
स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर प्रदेश में पहले भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। जहां सरकार इसे बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और कर्मचारी संगठन रोजगार, बिलिंग व्यवस्था तथा उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।



