पापा राव के सरेंडर पर CM साय का बड़ा बयान, बोले- 31 मार्च तक खत्म होगा नक्सलवाद…

रायपुर। नक्सली कमांडर पापा राव के संभावित सरेंडर की खबर के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान काफी अहम माना जा रहा है। सीएम साय ने कहा है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य अब बहुत करीब है, और अगर पापा राव जैसे बड़े कमांडर आत्मसमर्पण करते हैं तो यह सुरक्षा अभियान की बड़ी सफलता होगी। केंद्र सरकार भी इसी तारीख को नक्सलवाद समाप्ति की डेडलाइन के रूप में दोहरा चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम का मतलब सिर्फ एक सरेंडर नहीं, बल्कि बस्तर में नक्सली नेटवर्क की कमजोर होती पकड़ से भी जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में माओवादी सरेंडर कर चुके हैं। मार्च 2026 में ही बस्तर में 108 माओवादियों के आत्मसमर्पण की खबर सामने आई थी, जबकि इससे पहले भी दर्जनों कैडर मुख्यधारा में लौटे हैं। Bastar Range IG Sundarraj P के मुताबिक जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच बड़ी संख्या में माओवादी संगठन छोड़ चुके हैं, जो मैदान पर बदलती स्थिति की तरफ इशारा करता है।

पापा राव कौन है और उसका सरेंडर इतना बड़ा क्यों माना जा रहा है?
सूत्रों के मुताबिक पापा राव लंबे समय से बस्तर क्षेत्र में सक्रिय बड़े माओवादी चेहरों में गिना जाता रहा है। उसे वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़ा अहम चेहरा बताया जाता है। उस पर करीब 25 लाख रुपये का इनाम होने की बात भी सामने आई है। अगर ऐसा वरिष्ठ कमांडर सच में अपने साथियों और हथियारों समेत सरेंडर करता है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का आत्मसमर्पण नहीं होगा, बल्कि संगठन के कमांड ढांचे को बड़ा झटका माना जाएगा। इस दावे के कुछ हिस्से अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक पुष्टि का इंतजार करते दिखते हैं, इसलिए इन्हें फिलहाल सूत्र आधारित जानकारी के रूप में ही देखना चाहिए।

सीएम साय के बयान का राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
मुख्यमंत्री का बयान यह दिखाता है कि राज्य सरकार इस वक्त नक्सल विरोधी अभियान को अपने सबसे निर्णायक चरण में मान रही है। पिछले दिनों सीएम साय ने यह तक कहा था कि “नक्सलवाद खत्म हो चुका है, अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है।” यह बयान उन्होंने उन 140 सरेंडर कर चुके माओवादियों से मुलाकात के दौरान दिया था, जो विधानसभा पहुंचे थे। इससे साफ है कि सरकार अब सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ सरेंडर और पुनर्वास मॉडल को भी अपनी बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रही है।
बस्तर में अभी तस्वीर क्या है?
मैदान से आने वाली रिपोर्टें बताती हैं कि सुरक्षा बलों का दबाव काफी बढ़ा है। NDTV की एक रिपोर्ट में Bastar IG के हवाले से कहा गया था कि अब सक्रिय माओवादियों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम रह गई है और लड़ाई अपने अंतिम चरण में बताई जा रही है। दूसरी तरफ, लगातार एनकाउंटर, सरेंडर और पुनर्वास अभियान से संगठन की जमीनी और रणनीतिक क्षमता पर असर पड़ा है। इसी वजह से पापा राव जैसे नामों पर नजरें टिकी रहती हैं।
31 मार्च 2026 वाली डेडलाइन क्यों चर्चा में है?
यह डेडलाइन नई नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिसंबर 2025 में जगदलपुर में सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि 31 मार्च 2026 तक भारत, जिसमें बस्तर भी शामिल है, से नक्सलवाद खत्म कर दिया जाएगा। राज्य सरकार उसी लक्ष्य को बार-बार दोहरा रही है। इसलिए जब सीएम साय पापा राव के संभावित सरेंडर को इस डेडलाइन के संदर्भ में जोड़ते हैं, तो उसका सीधा संदेश यह है कि सरकार इसे अंतिम दौर की सफलता के रूप में देख रही है।
हालांकि एक जरूरी बात
आपके टेक्स्ट में पापा राव के 17 साथियों के साथ हथियारों सहित आत्मसमर्पण, उसे लाने के लिए टीम रवाना होने, और IG P. Sundarraj के सामने सरेंडर की जो बात है, उसकी मुझे अभी कोई ठोस आधिकारिक सार्वजनिक पुष्टि नहीं मिली। इसलिए इसे अभी संभावित/सूत्रों के हवाले से चल रही खबर मानना ज्यादा सही होगा। पुष्टि होने पर यह बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान की बेहद बड़ी घटना मानी जाएगी।



