छत्तीसगढ़

कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण में छत्तीसगढ़ बना देश के लिए मिसाल, नकली खाद पर 10 गुना अधिक कार्रवाई…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और नकली व अमानक खाद के कारोबार पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने बड़ा अभियान चलाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में राज्य में उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाया गया है।

उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत खरीफ सीजन 2026 में की गई प्रवर्तन कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2025 की तुलना में विभाग ने 10.25 गुना अधिक कार्रवाई करते हुए कुल मामलों की संख्या 44 से बढ़ाकर 451 कर दी है। यह उपलब्धि राज्य को उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है।

किसानों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार किसानों को केवल प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग राज्यभर में उर्वरकों के भंडारण, वितरण और बिक्री की नियमित निगरानी कर रहा है।

इसके लिए विभाग द्वारा—

  • उर्वरक विक्रेताओं का लगातार निरीक्षण,
  • खाद के नमूनों की जांच,
  • शिकायतों का त्वरित निराकरण,
  • नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई

जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

इस अभियान से नकली और अमानक उर्वरकों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगा है तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने में सफलता मिली है।

हर स्तर पर बढ़ी कार्रवाई

खरीफ सीजन 2026 के दौरान कृषि विभाग ने प्रवर्तन कार्रवाई के लगभग सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।

पिछले वर्ष की तुलना में—

  • कुल कार्रवाई 44 से बढ़कर 451 मामलों तक पहुंची।
  • न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरण 4 से बढ़कर 56 हुए।
  • जब्ती की कार्रवाई 2 से बढ़कर 98 मामलों तक पहुंची।
  • लाइसेंस निलंबन के मामले 3 से बढ़कर 97 हो गए।
  • लाइसेंस निरस्तीकरण 2 से बढ़कर 10 मामलों तक पहुंचा।
  • विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई 33 से बढ़कर 183 हो गई।
  • पहली बार 7 एफआईआर भी दर्ज कराई गईं।

ये आंकड़े बताते हैं कि विभाग ने नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त रुख अपनाया है और दोषियों के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति पर काम किया है।

सख्त कार्रवाई से किसानों का बढ़ा विश्वास

कृषि विभाग का कहना है कि लगातार निरीक्षण और दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के कारण किसानों का विभाग पर भरोसा पहले की तुलना में काफी बढ़ा है।

अब किसान यह विश्वास कर पा रहे हैं कि बाजार में उपलब्ध उर्वरकों की गुणवत्ता पर सरकार की प्रभावी निगरानी है और यदि कहीं गड़बड़ी मिलती है तो तत्काल कार्रवाई की जाती है।

इससे किसानों को नकली खाद से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिल रही है और खेती की लागत तथा उत्पादन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

नियमित निगरानी से पारदर्शी व्यवस्था

राज्यभर में कृषि विभाग की टीमें लगातार उर्वरक विक्रेताओं, गोदामों और वितरण केंद्रों का निरीक्षण कर रही हैं।

निरीक्षण के दौरान—

  • उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच,
  • स्टॉक का सत्यापन,
  • बिक्री अभिलेखों की जांच,
  • नमूनों का परीक्षण,
  • शिकायतों का मौके पर निराकरण

जैसी प्रक्रियाओं को नियमित रूप से अपनाया जा रहा है।

इससे पूरी आपूर्ति व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है।

गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों से बढ़ेगी उत्पादकता

कृषि विभाग का मानना है कि उसका उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है।

गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों के उपयोग से—

  • फसल उत्पादन में वृद्धि होगी।
  • मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।
  • किसानों की उत्पादन लागत नियंत्रित होगी।
  • कृषि आय में बढ़ोतरी होगी।
  • टिकाऊ और सुरक्षित खेती को बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रीय स्तर पर बन रहा प्रभावी मॉडल

कृषि विभाग के अनुसार, कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में लागू की गई सख्त निगरानी व्यवस्था, नियमित निरीक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण और दोषी विक्रेताओं के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ को उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी उदाहरण के रूप में स्थापित किया है।

राज्य सरकार का लक्ष्य आगे भी किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना, नकली उर्वरकों पर पूरी तरह अंकुश लगाना और पारदर्शी कृषि व्यवस्था विकसित करना है, ताकि प्रदेश के किसान अधिक सुरक्षित, लाभकारी और आधुनिक खेती की दिशा में आगे बढ़ सकें।

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