खेल मंत्रालय की बड़ी पहल: देशभर में कोचिंग व्यवस्था सुधारने के लिए बनेगा नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड…

नई दिल्ली। भारत में खेलों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए खेल मंत्रालय बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने घोषणा की है कि देशभर में कोचिंग की गुणवत्ता को एक समान और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड (NCAB) की स्थापना की तैयारी की जा रही है।
यह पहल भारतीय बैडमिंटन के दिग्गज कोच Pullela Gopichand की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर की जा रही है। टास्क फोर्स ने जनवरी में अपनी 43 पन्नों की रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौंपी थी।

क्या होगा NCAB का काम?
प्रस्तावित नेशनल कोच एक्रेडिटेशन बोर्ड देश में कोचिंग व्यवस्था की सर्वोच्च संस्था होगी। इसका उद्देश्य—
- कोचिंग के राष्ट्रीय मानक तय करना
- कोचों की ट्रेनिंग और प्रमाणन (Accreditation) सुनिश्चित करना
- जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना
- खेल संस्थानों, फेडरेशन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना
- अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोचिंग सिस्टम का विकास करना
रिपोर्ट में NCAB को भारतीय खेल कोचिंग व्यवस्था की “केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली” (Central Nervous System) बताया गया है, जो पूरे सिस्टम को एकीकृत रूप से संचालित करेगी।
खेल विज्ञान को मिलेगा बढ़ावा
खेल मंत्री मंडाविया ने कहा कि अब कोचिंग को आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस से जोड़ा जाएगा। उनका मानना है कि वर्तमान में खेल विज्ञान की तकनीकों और शोध का पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो रहा है क्योंकि कई कोच नई पद्धतियों को अपनाने में संकोच करते हैं।
नई व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों के प्रदर्शन, फिटनेस, रिकवरी और चोट प्रबंधन में वैज्ञानिक तरीकों का अधिक इस्तेमाल किया जाएगा।
कोचों के लिए बनेगी राष्ट्रीय रजिस्ट्री
मंत्रालय ने बताया कि NCAB लागू करने के लिए प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके तहत—
- नेशनल कोच रजिस्ट्री बनाई जाएगी
- ऑनलाइन एक्रेडिटेशन पोर्टल शुरू होगा
- कोचों के लिए समर्पित हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी
इससे देशभर के कोचों का डेटा, योग्यता और प्रशिक्षण रिकॉर्ड एक ही मंच पर उपलब्ध होगा।
मौजूदा व्यवस्था में क्या है समस्या?
टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत का कोचिंग तंत्र अभी बिखरा हुआ और असंगठित है। कई स्थानों पर कोचिंग की गुणवत्ता अलग-अलग है और व्यवस्था संस्थागत मजबूती के बजाय व्यक्तिगत प्रयासों पर अधिक निर्भर करती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कठिन प्रशिक्षण परिस्थितियों में खिलाड़ियों के हितों की रक्षा करते हुए कोचों के पेशेवर अधिकारों और निर्णयों को भी पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।
700 से ज्यादा खाली पद भरने की तैयारी
खेल मंत्री ने बताया कि भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में लंबे समय से खाली पड़े 700 से अधिक कोचिंग पदों को इस वर्ष के अंत तक भरने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक विभिन्न खेलों में करीब 250 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं। इसके अलावा ओलंपिक खिलाड़ियों को भी कोचिंग व्यवस्था से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है ताकि उनके अनुभव का लाभ युवा खिलाड़ियों को मिल सके।
Sports Authority of India की योजना
- असिस्टेंट कोचों की भर्ती प्रक्रिया शुरू
- अनुभवी ओलंपियन खिलाड़ियों को कोचिंग से जोड़ने की तैयारी
- विशेषज्ञता आधारित प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने की योजना
शिलांग में बनेगा हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर
खेल मंत्रालय ने पूर्वोत्तर भारत में खेल सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा फैसला लिया है। Shillong में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर (HATC) बनाया जाएगा।
यह केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण केंद्रों जैसे—
- St. Moritz
- Colorado Springs
की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
खिलाड़ियों को क्या होगा फायदा?
समुद्र तल से लगभग 1,496 मीटर की ऊंचाई पर स्थित शिलांग का वातावरण खिलाड़ियों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।
इस केंद्र से—
- सहनशक्ति (Endurance) बढ़ेगी
- रिकवरी तेज होगी
- ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा की तैयारी बेहतर होगी
- एथलेटिक्स, तैराकी, साइक्लिंग, मुक्केबाजी, नौकायन और कुश्ती जैसे खेलों को लाभ मिलेगा
अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी उपलब्ध
HATC में निम्न सुविधाएं विकसित की जाएंगी—
- आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस भवन
- 450 खिलाड़ियों के रहने की व्यवस्था
- इनडोर गर्म स्विमिंग पूल
- प्राकृतिक प्रशिक्षण ट्रैक
- उन्नत एथलेटिक्स ट्रैक
- आधुनिक फुटबॉल मैदान
- बेहतर रिकवरी और फिजियोथेरेपी सुविधाएं
भारतीय खेलों के लिए क्यों अहम है यह कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NCAB और हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर जैसी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत की खेल संरचना में बड़ा बदलाव आ सकता है। एक ओर कोचिंग व्यवस्था अधिक पेशेवर और वैज्ञानिक बनेगी, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी। इससे आने वाले ओलंपिक, एशियाई खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के प्रदर्शन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।



