जन्माष्टमी पर बड़ा ऐलान: दुनियाभर में रिलीज होगी ‘कृष्णावतारम’ ट्रिलॉजी, WFAC और क्रिएटिवलैंड स्टूडियोज ने मिलाया हाथ

Krishnavatram Global Release: जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भारतीय सिनेमा और संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहुंचाने से जुड़ी एक बड़ी घोषणा सामने आई है। ‘कृष्णावतारम’ ट्रिलॉजी को अब भारत के बाहर भी बड़े स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए वर्ल्ड फोरम फॉर आर्ट एंड कल्चर (WFAC) और निर्माता डॉ. साजन राज कुरुप के क्रिएटिवलैंड स्टूडियोज के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी हुई है।

इस साझेदारी को गुरुदेव श्री श्री रविशंकर की मौजूदगी में औपचारिक रूप दिया गया। दोनों संस्थाओं के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के बाद ‘कृष्णावतारम’ को केवल एक फिल्म के तौर पर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और विरासत को दुनिया तक पहुंचाने वाली व्यापक पहल के रूप में आगे बढ़ाने की योजना है।
‘कृष्णावतारम: पार्ट 1 – हृदयम’ से शुरू हुआ सफर
‘कृष्णावतारम’ ट्रिलॉजी की पहली फिल्म ‘कृष्णावतारम: पार्ट 1 – हृदयम’ है। फिल्म की कहानी भगवान कृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं और उनके दिव्य सफर से प्रेरित है।
भारत में रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब मेकर्स ने इसका दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। योजना के तहत फिल्म को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं में रुचि रखने वाले विदेशी दर्शकों तक भी पहुंचाया जाएगा।
चार भाषाओं में होगी ग्लोबल रिलीज
‘कृष्णावतारम’ की अंतरराष्ट्रीय रिलीज को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। फिल्म को हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी भाषाओं में दुनियाभर के दर्शकों के सामने पेश किया जाएगा।
मेकर्स के मुताबिक इसका उद्देश्य सिर्फ किसी भारतीय फिल्म को विदेशी बाजारों में रिलीज करना नहीं है। इसके पीछे बड़ा लक्ष्य भगवान कृष्ण की कथा, भारतीय कला, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाना है।
भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक सिनेमाई माध्यम से दुनिया के सामने रखने की यह कोशिश भारतीय सिनेमा के लिए भी एक अलग तरह का प्रयोग मानी जा रही है।
फिल्म से आगे बढ़ेगा ‘कृष्णावतारम’ का संसार
‘कृष्णावतारम’ को केवल तीन फिल्मों तक सीमित रखने की योजना नहीं है। इस प्रोजेक्ट को एक व्यापक ग्लोबल कल्चरल फ्रैंचाइजी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसके तहत आने वाले समय में सिनेमा के अलावा कई अन्य माध्यमों को भी जोड़ा जा सकता है। इनमें:
- सीरीज
- म्यूजिक
- लाइव एक्सपीरियंस
- गेम्स
- एजुकेशनल कंटेंट
- इमर्सिव कल्चरल एक्सपीरियंस
जैसे माध्यम शामिल हैं।
इसका मकसद भगवान कृष्ण की कथा और उससे जुड़े भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को अलग-अलग फॉर्मेट के जरिए नई पीढ़ी और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाना है।
श्री श्री रविशंकर का मिला आशीर्वाद
इस पूरे प्रोजेक्ट को आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का समर्थन और मार्गदर्शन भी मिला है। फिल्म से प्रभावित होकर गुरुदेव निर्माता डॉ. साजन राज कुरुप और क्रिएटिवलैंड के लिए मार्गदर्शक की भूमिका में आगे आए हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर WFAC और क्रिएटिवलैंड के बीच हुआ समझौता इस प्रोजेक्ट के वैश्विक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने कृष्ण के स्वरूप और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझाते हुए कहा कि कृष्ण का अर्थ सबसे आकर्षक आत्मा से जुड़ा है। उनके अनुसार जब व्यक्ति यह अनुभव करने लगता है कि जीवन और संसार एक लीला है, तब उसके भीतर कृष्ण का जन्म होता है।
निर्माता साजन राज कुरुप ने बताया अपना विजन
निर्माता डॉ. साजन राज कुरुप ने इस साझेदारी को ‘कृष्णावतारम’ के लिए विशेष महत्व वाला बताया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का आशीर्वाद इस प्रोजेक्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
निर्माता के अनुसार ‘कृष्णावतारम’ के जरिए भारतीय संस्कृति और सांस्कृतिक मान्यताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका विजन इस फिल्म को एक ऐसे वैश्विक सांस्कृतिक आंदोलन में बदलना है, जिसमें सिनेमा के साथ भारतीय कला और विरासत का भी उत्सव मनाया जाए।
कुरुप के मुताबिक फिल्म के माध्यम से भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
WFAC क्या है और इसकी भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
World Forum for Art and Culture (WFAC) आर्ट ऑफ लिविंग के तहत काम करने वाला एक वैश्विक सांस्कृतिक मंच है। इसकी स्थापना सितंबर 2020 में की गई थी। WFAC का उद्देश्य दुनिया भर के कलाकारों, परफॉर्मर्स और कला प्रेमियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।
यह मंच गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के ‘वन वर्ल्ड फैमिली’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार से प्रेरित है। कला और संस्कृति के माध्यम से अलग-अलग देशों और समुदायों को जोड़ना इसकी प्रमुख सोच का हिस्सा है।
ऐसे में ‘कृष्णावतारम’ जैसे प्रोजेक्ट के साथ WFAC की साझेदारी फिल्म को एक सामान्य इंटरनेशनल रिलीज से आगे ले जाकर भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रस्तुति का माध्यम बना सकती है।
भारतीय संस्कृति को ग्लोबल मंच देने की कोशिश
भारतीय पौराणिक कथाओं और देवी-देवताओं से जुड़ी कहानियों को आधुनिक तकनीक और सिनेमा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का चलन लगातार बढ़ रहा है। ‘कृष्णावतारम’ इसी दिशा में एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तौर पर सामने आया है।
ट्रिलॉजी के जरिए भगवान कृष्ण की जीवन यात्रा और उनके संदेश को अलग-अलग भाषाओं और माध्यमों के जरिए प्रस्तुत करने की योजना है। इससे भारतीय प्रवासियों के साथ-साथ उन विदेशी दर्शकों को भी जोड़ने की कोशिश होगी, जो भारतीय दर्शन, आध्यात्मिकता और पौराणिक कथाओं में रुचि रखते हैं।
‘हृदयम’ से शुरू हुआ सफर अब बनेगा ग्लोबल कल्चरल मूवमेंट
‘कृष्णावतारम: पार्ट 1 – हृदयम’ से शुरू हुआ यह सफर अब भारत की सीमाओं से बाहर निकलने की तैयारी में है। चार भाषाओं में ग्लोबल रिलीज और सिनेमा के साथ सीरीज, म्यूजिक, गेम्स तथा इमर्सिव अनुभव जैसे माध्यमों को जोड़ने की योजना इसे एक बड़े सांस्कृतिक प्रोजेक्ट का रूप देती है।
जन्माष्टमी के मौके पर हुई यह साझेदारी इसलिए भी खास है क्योंकि इसका लक्ष्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण की कथा के माध्यम से भारतीय कला, संस्कृति और विरासत को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना है।



