जनगणना से पहले बड़ा बदलाव: दिल्ली में शुरू होगी ऑनलाइन आत्मगणना प्रक्रिया…

दिल्ली में आगामी जनगणना से पहले एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है, जिसके तहत लोगों के मकान और जीवन स्तर से जुड़ी जानकारी पहले ही एकत्र की जाएगी। यह प्रक्रिया राजधानी के दो प्रमुख निकायों—New Delhi Municipal Council और Municipal Corporation of Delhi—के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
🔹 क्या है हाउसिंग और जीवन स्तर सर्वे?
यह सर्वे जनगणना का पहला चरण होगा, जिसमें लोगों के:
- मकान की स्थिति
- बुनियादी सुविधाएं
- आर्थिक और सामाजिक जीवन स्तर
से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। इसका उद्देश्य सरकार को सटीक डेटा देना है, ताकि योजनाएं बेहतर बनाई जा सकें।

🔹 कब और कैसे भरनी होगी जानकारी?
दिल्ली में यह प्रक्रिया दो हिस्सों में होगी:
- NDMC क्षेत्र: 1 से 15 अप्रैल
- MCD क्षेत्र: 1 से 15 मई
लोग खुद ऑनलाइन पोर्टल Census of India की वेबसाइट पर जाकर अपनी जानकारी भर सकेंगे।
फॉर्म भरने के बाद:
- एक यूनिक आईडी नंबर मिलेगा
- बाद में गणना अधिकारी उसी नंबर से जानकारी वेरिफाई करेंगे
🔹 सर्वे में पूछे जाएंगे ये सवाल
इस बार सर्वे काफी विस्तृत होगा। इसमें शामिल हैं:
🏠 मकान से जुड़े सवाल
- मकान का प्रकार (पक्का/कच्चा)
- दीवार, छत और फर्श की सामग्री
- मकान मालिक हैं या किरायेदार
👨👩👧 परिवार की जानकारी
- घर में रहने वाले लोगों की संख्या
- कमरों की संख्या
🚿 सुविधाएं
- अलग किचन है या नहीं
- शौचालय और बाथरूम की सुविधा
- पीने के पानी का स्रोत
🔥 ईंधन और जीवनशैली
- खाना बनाने के लिए LPG/PNG या अन्य ईंधन
- इंटरनेट, टीवी, फोन, DTH जैसी सुविधाएं
- साइकिल, बाइक, कार जैसी संपत्ति
🔹 ऑनलाइन आत्मगणना (Self Enumeration) कैसे करें?
- आधिकारिक वेबसाइट खोलें
- नाम और मोबाइल नंबर से OTP के जरिए रजिस्ट्रेशन करें
- डिजिटल मैप में अपने घर की लोकेशन चिन्हित करें
- पूछे गए सवालों के जवाब भरें
- अंत में फॉर्म चेक कर सबमिट करें
🔹 क्या होंगे फायदे?
- बार-बार जानकारी देने की जरूरत नहीं
- अधिकारी सिर्फ वेरिफिकेशन करेंगे
- पूरी प्रक्रिया होगी तेज, आसान और पारदर्शी
🔹 डेटा रहेगा सुरक्षित
अधिकारियों के अनुसार:
- सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी
- डेटा का उपयोग केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के लिए किया जाएगा
🔹 अन्य राज्यों के लिए समय-सीमा
केंद्र सरकार ने अलग-अलग राज्यों के लिए 15 दिन की अवधि तय की है:
- उत्तराखंड: 10–24 अप्रैल
- छत्तीसगढ़: 16–30 अप्रैल
- बिहार: 17 अप्रैल–1 मई
- झारखंड: 1–15 मई
- उत्तर प्रदेश: 7–21 मई
🔹 कुल मिलाकर
यह नई डिजिटल व्यवस्था जनगणना को आधुनिक, पारदर्शी और कम समय में पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकार को भी सटीक और भरोसेमंद डेटा मिलेगा, जिससे भविष्य की योजनाएं और अधिक प्रभावी बन सकेंगी।



