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ITBP जवानों ने बचाई दो जिंदगियां, गर्भवती महिला को 5 किमी कंधों पर ढोकर पहुंचाया अस्पताल…

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दुर्गम Abujhmad क्षेत्र से मानवता, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। Indo-Tibetan Border Police (ITBP) के जवानों और Narayanpur Police ने मिलकर एक गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए कठिन परिस्थितियों में साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस संवेदनशील और मानवीय प्रयास के चलते न केवल महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका, बल्कि मां और नवजात दोनों की जान भी सुरक्षित बच गई।

यह मामला इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र के सुदूर गांव बोटेर का है, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी ग्रामीण जीवन को बेहद कठिन बनाता है। यहां रहने वाली एक गर्भवती महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद गांव में चिंता का माहौल बन गया। महिला की स्थिति गंभीर थी और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी, लेकिन दुर्गम जंगल, पहाड़ी रास्ते और सड़क सुविधा के अभाव के कारण अस्पताल तक पहुंचाना आसान नहीं था।

जंगल, पहाड़ और कच्चे रास्तों के बीच शुरू हुआ जीवन बचाने का मिशन

महिला की हालत की जानकारी मिलते ही ITBP की 29वीं बटालियन और नारायणपुर पुलिस की टीम तुरंत सक्रिय हुई। समय की नाजुकता को समझते हुए जवानों ने किसी भी तरह की देरी किए बिना संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
यह सिर्फ एक ड्यूटी नहीं थी, बल्कि मानवता की रक्षा का मिशन था।

जवानों ने बेहद कठिन और जोखिम भरे हालात में महिला को स्ट्रेचर पर लिटाकर कंधों के सहारे उठाया और करीब 5 किलोमीटर तक घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और कच्चे मार्गों को पार करते हुए उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इस दौरान रास्ता कहीं भी आसान नहीं था, लेकिन जवानों का हौसला और संवेदनशीलता हर मुश्किल पर भारी पड़ी।

सिर्फ सुरक्षा नहीं, संवेदना का भी फर्ज निभाया

ITBP और पुलिस जवानों ने इस ऑपरेशन के जरिए यह साबित कर दिया कि वर्दी केवल सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं निभाती, बल्कि जरूरत पड़ने पर जीवन बचाने की सबसे बड़ी उम्मीद भी बनती है।
कंधों पर एक गर्भवती महिला को उठाकर कठिन जंगलों से निकालना सिर्फ शारीरिक परिश्रम नहीं, बल्कि कर्तव्य, करुणा और सेवा भाव का असाधारण उदाहरण है।

स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह दृश्य भावुक कर देने वाला था। जहां एक ओर गांव के लोग महिला की जान को लेकर चिंतित थे, वहीं दूसरी ओर जवानों की तत्परता ने उन्हें राहत और भरोसा दिया।

समय पर अस्पताल पहुंचाने से बची दो जिंदगियां

कड़ी मशक्कत के बाद जवान महिला को सुरक्षित सड़क मार्ग तक लेकर पहुंचे, जहां से उसे तुरंत ओरछा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और महिला की हालत को संभाला।

चिकित्सकीय देखरेख में महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया। राहत की बात यह रही कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह खबर सामने आते ही पूरे क्षेत्र में खुशी और संतोष का माहौल बन गया।

अबूझमाड़ की हकीकत फिर आई सामने

यह घटना एक बार फिर अबूझमाड़ और नारायणपुर जैसे दूरस्थ आदिवासी इलाकों की वास्तविक चुनौतियों को भी उजागर करती है। आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां सड़क, एंबुलेंस, स्वास्थ्य केंद्र और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसे इलाकों में किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा बल ही अक्सर जीवन रक्षक भूमिका निभाते नजर आते हैं।

यह रेस्क्यू ऑपरेशन न केवल एक महिला और उसके बच्चे की जिंदगी बचाने की कहानी है, बल्कि यह उन बुनियादी जरूरतों की ओर भी ध्यान खींचता है, जो आज भी कई ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में अधूरी हैं।

जवानों के जज्बे को मिल रही सराहना

ITBP जवानों और नारायणपुर पुलिस की इस मानवीय पहल की अब हर ओर सराहना हो रही है। लोग इसे मानवता, सेवा और समर्पण की मिसाल बता रहे हैं।
अक्सर सुरक्षा अभियानों और चुनौतियों के बीच काम करने वाले ये जवान इस घटना के जरिए यह संदेश दे रहे हैं कि जनसेवा ही उनकी असली पहचान है।

मानवता की सबसे सुंदर तस्वीर

नारायणपुर के जंगलों से सामने आई यह घटना केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि मानवता की सबसे सुंदर तस्वीर है—जहां वर्दी ने सिर्फ सुरक्षा नहीं दी, बल्कि एक मां और उसके बच्चे को नया जीवन दिया।

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