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दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निभाई गजपति महाराजा की परंपरा, भगवान जगन्नाथ का रथ खींचकर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना….

जशपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शुक्रवार को जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित ग्राम दोकड़ा में आयोजित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव-2026 में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने गजपति महाराजा की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान के रथ के आगे ‘छेरा पहरा’ की रस्म निभाई और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

सोने की झाड़ू से निभाई ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रथयात्रा के शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पारंपरिक छेरा पहरा अनुष्ठान के तहत भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से प्रतीकात्मक रूप से मार्ग का मार्जन किया। इसके बाद उन्होंने चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव कर भगवान से राज्य की समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की। यह परंपरा ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर की प्रसिद्ध रथयात्रा से जुड़ी है, जिसमें गजपति महाराजा स्वयं भगवान के सेवक के रूप में यह अनुष्ठान करते हैं।

हजारों श्रद्धालुओं के साथ खींचा भगवान जगन्नाथ का रथ

पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भगवान श्री जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। पूरे दोकड़ा क्षेत्र में “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि, हरिनाम संकीर्तन, भजन और कीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान के रथ के साथ चलते नजर आए।

1942 से चली आ रही है दोकड़ा रथयात्रा की गौरवशाली परंपरा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा आस्था, संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस रथयात्रा की शुरुआत वर्ष 1942 में हुई थी और तब से यह परंपरा लगातार जनआस्था को मजबूत करती आ रही है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया और वर्ष 2025 में भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। इसके बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने गजपति महाराजा की परंपरा निभाने का अवसर देने के लिए दोकड़ा के नागरिकों का आभार भी व्यक्त किया।

छत्तीसगढ़ और भगवान जगन्नाथ का है प्राचीन संबंध

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ और भगवान श्री जगन्नाथ का संबंध सदियों पुराना और अत्यंत आत्मीय है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के देवभोग क्षेत्र का प्रसिद्ध चावल आज भी पुरी के भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद में उपयोग किया जाता है। यह दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी श्रद्धालुओं के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि—

  • प्रदेश में प्रधानमंत्री की गारंटी के तहत 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूरे किए जा चुके हैं।
  • महतारी वंदन योजना की 29 किस्तें सफलतापूर्वक महिलाओं के खातों में जारी की जा चुकी हैं।
  • रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राओं का लाभ मिला है।
  • राज्य सरकार प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास और धार्मिक पर्यटन को भी प्राथमिकता दे रही है।

बिजली उपभोक्ताओं और ग्रामीणों को बड़ी राहत

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम जनता को राहत देने के लिए बिजली सरचार्ज माफी योजना की अवधि तीन महीने और बढ़ा दी गई है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का चौबीसों घंटे त्वरित समाधान किया जा रहा है।

इसके साथ ही प्रदेशभर में संचालित अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके गांव में ही 520 से अधिक शासकीय सेवाएं तथा बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जशपुर में रेल और मेडिकल कॉलेज की सौगात

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर जिले के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि धरमजयगढ़-लोहरदगा रेल परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है, जिससे भविष्य में जशपुर रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।

इसके अलावा जिले में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति मिलने से स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर विकसित होंगे और स्थानीय युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

ओडिशा की कीर्तन मंडलियों ने बांधा समां

रथयात्रा के दौरान ओडिशा से आई प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों ने भगवान जगन्नाथ की महिमा का संकीर्तन प्रस्तुत किया। ढोल, मृदंग, झांझ और शंखध्वनि के साथ भजन-कीर्तन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित हजारों श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में भाग लेकर इसे आस्था और लोक संस्कृति के विराट उत्सव का स्वरूप दिया।

कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, श्री जगन्नाथ मंदिर आयोजन समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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