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दलपत सागर की सफाई पर खर्च होंगे 50 लाख रुपये, जलकुंभी हटाने फिर शुरू होगा अभियान; स्थायी समाधान की उठी मांग

जगदलपुर। बस्तर की ऐतिहासिक पहचान और जगदलपुर शहर के प्रमुख जलस्रोत दलपत सागर की सफाई के लिए एक बार फिर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। दलपत सागर में तेजी से फैल रही जलकुंभी को हटाने के लिए इस बार करीब 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। नगर निगम और एनएमडीसी के बीच हुए समझौते के तहत यह राशि सीएसआर मद से उपलब्ध कराई जाएगी।

सफाई अभियान के पहले चरण के लिए 20 लाख रुपये की राशि जारी भी की जा चुकी है। अब मशीनों और अन्य आवश्यक संसाधनों की मदद से दलपत सागर से जलकुंभी हटाने का काम शुरू किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य सागर के जल क्षेत्र को जलकुंभी के फैलाव से मुक्त करना और इसकी साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

मशीनों और संसाधनों से हटाई जाएगी जलकुंभी

दलपत सागर में जलकुंभी का फैलाव लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ है। पानी की सतह पर बड़ी मात्रा में जलकुंभी जमा होने से सागर का स्वरूप प्रभावित होता है। इसे हटाने के लिए इस बार मशीनों और आवश्यक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

पहले चरण में जारी की गई 20 लाख रुपये की राशि से सफाई अभियान की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद समझौते के तहत निर्धारित कुल 50 लाख रुपये की राशि का उपयोग दलपत सागर की सफाई और जलकुंभी हटाने के लिए किया जाएगा।

बार-बार अभियान के बाद फिर लौट आती है जलकुंभी

हालांकि, दलपत सागर की सफाई को लेकर इस बार सबसे बड़ा सवाल जलकुंभी के स्थायी समाधान का है। इससे पहले भी कई बार दलपत सागर में सफाई अभियान चलाए जा चुके हैं। हर बार जलकुंभी हटाने पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन कुछ समय बाद यह समस्या दोबारा सामने आ गई।

यही वजह है कि इस बार केवल जलकुंभी हटाने के बजाय उसके दोबारा पनपने के कारणों पर भी काम करने की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि सफाई के कुछ महीनों बाद फिर से पूरे जल क्षेत्र में जलकुंभी फैल जाती है तो अभियान पर खर्च की गई बड़ी राशि को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सफाई के साथ कारणों का समाधान जरूरी

शहरवासियों का कहना है कि दलपत सागर की सफाई सिर्फ जलकुंभी निकालने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जलकुंभी तेजी से क्यों बढ़ रही है, पानी में किस तरह के अपशिष्ट या पोषक तत्व पहुंच रहे हैं और जलस्रोत की प्राकृतिक स्थिति को कैसे बेहतर किया जा सकता है, इन पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

यदि जलकुंभी के बढ़ने के मूल कारणों का पता लगाकर उनका समाधान किया जाए तो बार-बार सफाई अभियान चलाने और उस पर बड़ी राशि खर्च करने की जरूरत कम हो सकती है।

50 लाख रुपये के खर्च पर रहेगी निगाह

इस बार दलपत सागर की सफाई के लिए कुल 50 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। राशि सीएसआर मद से उपलब्ध होने के कारण अभियान को लेकर शहरवासियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

लोग चाहते हैं कि इस राशि का इस्तेमाल केवल तत्काल सफाई के लिए नहीं, बल्कि दलपत सागर की दीर्घकालीन देखरेख और संरक्षण की दिशा में भी प्रभावी तरीके से किया जाए। सफाई के बाद जलकुंभी दोबारा न फैले, इसके लिए नियमित निगरानी और आवश्यक उपाय किए जाने की जरूरत है।

ऐतिहासिक पहचान है दलपत सागर

दलपत सागर जगदलपुर शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। शहर के बीच स्थित यह जलस्रोत लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में इसकी स्थिति का सीधा असर शहर की पहचान और पर्यटन की संभावनाओं पर भी पड़ता है।

शहरवासियों का मानना है कि दलपत सागर का संरक्षण किसी एक सफाई अभियान तक सीमित नहीं होना चाहिए। जलस्रोत की नियमित सफाई, जल गुणवत्ता की निगरानी, जलकुंभी की रोकथाम और आसपास के क्षेत्र के व्यवस्थित विकास के लिए एक दीर्घकालीन योजना तैयार की जानी चाहिए।

इस बार स्थायी समाधान की उम्मीद

दलपत सागर की सफाई के लिए एक बार फिर 50 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पहले चरण में 20 लाख रुपये जारी हो चुके हैं और जल्द ही मशीनों के जरिए जलकुंभी हटाने का काम शुरू किया जाएगा।

अब शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि इस अभियान के बाद दलपत सागर की स्थिति कितनी सुधरती है और जलकुंभी को दोबारा फैलने से रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था की जाती है।

अगर इस बार सफाई के साथ जलकुंभी की समस्या के मूल कारणों पर भी काम किया गया, तो दलपत सागर को लंबे समय तक साफ और सुंदर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं केवल जलकुंभी हटाकर अभियान खत्म कर दिया गया और कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो गई, तो 50 लाख रुपये के खर्च की उपयोगिता पर सवाल उठना तय है।

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