छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ SIR में 24 लाख से अधिक नाम कटे, सियासत तेज…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। इस अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाता सूची की जांच-पड़ताल की गई, जिसके बाद करीब 24,99,823 नाम सूची से हटाए गए हैं। अब प्रदेश में कुल 1,87,30,914 पंजीकृत मतदाता रह गए हैं।

निर्वाचन आयोग के मुताबिक, हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट और अन्य कारणों से अयोग्य पाए गए मतदाता शामिल हैं। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।


कांग्रेस का आरोप: आयोग भाजपा का एजेंट

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदु ने आरोप लगाया कि भाजपा ने प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटवाए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के जरिए दबाव बनाकर वोट हटाए गए और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ अन्याय है।

कांग्रेस ने इस मामले में निर्वाचन आयोग को शिकायत भी सौंपी है। पार्टी का कहना है कि आयोग निष्पक्ष रूप से काम करने के बजाय “भाजपा के एजेंट” की तरह व्यवहार कर रहा है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि जिन क्षेत्रों में पार्टी का जनाधार मजबूत है, वहां विशेष रूप से नाम हटाने की कार्रवाई की गई है।


भाजपा का पलटवार: संवैधानिक संस्थाओं पर अविश्वास

वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश की संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास नहीं है।

किरण सिंहदेव ने सवाल उठाया कि यदि निर्वाचन प्रक्रिया पर ही संदेह है, तो जिन राज्यों या क्षेत्रों में कांग्रेस जीतती है, वहां ईवीएम या मतदाता सूची पर सवाल क्यों नहीं उठते? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और कांग्रेस सरकार में आने की जल्दबाजी में माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है।


SIR प्रक्रिया क्या है?

विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) एक नियमित प्रक्रिया है, जिसके तहत—

  • मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं
  • एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हुए लोगों के नाम अपडेट किए जाते हैं
  • डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाया जाता है
  • नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है

इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखना है, ताकि चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो सकें।


आगे क्या?

राजनीतिक विवाद के बीच अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस की शिकायत पर निर्वाचन आयोग क्या रुख अपनाता है। यदि जरूरत पड़ी तो मामला न्यायालय तक भी जा सकता है।

फिलहाल, SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी जारी है और आने वाले चुनावी समीकरणों पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।

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