छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ से अलग बस्तर राज्य की मांग पर CM साय का बड़ा बयान, बोले- मांग करने वाले विकास विरोधी

रायपुर। छत्तीसगढ़ से अलग बस्तर राज्य बनाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने इस मांग को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग करने वाले लोग विकास विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में डबल इंजन सरकार के प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है और जिन इलाकों में कभी विकास कार्यों को बाधित किया जाता था, वहां अब सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने दो दिवसीय दिल्ली दौरे के बाद शुक्रवार को राजधानी रायपुर लौटे। रायपुर एयरपोर्ट पर जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। लोगों ने बाजे-गाजे और गुलदस्ते के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्तर पर आयोजित बैठकों में हिस्सा लिया और विभिन्न मुद्दों पर केंद्रीय नेताओं एवं अधिकारियों से चर्चा की। रायपुर लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने जल संरक्षण से लेकर बस्तर में विकास और नक्सलवाद के मुद्दे पर अपनी बात रखी।

जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ का बेहतर प्रदर्शन

मुख्यमंत्री साय ने दिल्ली में हुई जल शक्ति मंत्रालय की बैठक को लेकर कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है।

सीएम साय के मुताबिक, जल संरक्षण के मामले में छत्तीसगढ़ के 5 जिले देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बारिश के मौसम में पानी का उपयोग करना नहीं, बल्कि बारिश की हर बूंद को संरक्षित कर उसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण आज आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इसके लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।

हर राज्य को अपनी परिस्थितियों के हिसाब से बनाना चाहिए ‘कैच द रेन प्लान’

जल शक्ति मंत्रालय की बैठक में मुख्यमंत्री साय ने जल संरक्षण को लेकर कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक राज्य को अपनी भौगोलिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों में बारिश, भूगोल और जल स्रोतों की स्थिति अलग होती है। ऐसे में जल संरक्षण के लिए एक जैसी रणनीति के बजाय स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों और जिलों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का सुझाव भी दिया। उनका कहना है कि तकनीक, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी को जोड़कर जल संरक्षण के अभियान को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

अलग बस्तर राज्य की मांग पर CM साय ने क्या कहा?

पत्रकारों ने मुख्यमंत्री साय से छत्तीसगढ़ से अलग बस्तर राज्य बनाने की मांग को लेकर सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार में नक्सलवाद के खात्मे का वह काम संभव हुआ है, जिसे कभी असंभव माना जाता था।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद बस्तर के विकास में बड़ी बाधा बना रहा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, स्कूल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण का विरोध किया जाता था। विकास कार्यों को प्रभावित करने के लिए हिंसा और भय का माहौल बनाया जाता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब स्थिति बदल रही है और सरकार का फोकस बस्तर के विकास के साथ-साथ नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर है।

‘PM मोदी के आशीर्वाद और अमित शाह की इच्छाशक्ति से मिली सफलता’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता के पीछे केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए सुरक्षा बलों के जवानों के साहस की भी सराहना की।

सीएम साय ने कहा कि सुरक्षा बलों के जवानों ने कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार का उद्देश्य नक्सलवाद के प्रभाव को खत्म करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देना है।

अलग राज्य की मांग को बताया विकास विरोधी

मुख्यमंत्री ने बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी मांग विकास विरोधी सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बस्तर को छत्तीसगढ़ से अलग करने की मांग करने वाले लोग छत्तीसगढ़ की जनता के हितों के खिलाफ बात कर रहे हैं।

सीएम साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ना, वहां विकास की गति बढ़ाना और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विस्तार के जरिए बस्तर के दूरस्थ इलाकों तक विकास पहुंचाने पर सरकार का जोर है।

बस्तर में विकास को गति देने पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि राज्य सरकार बस्तर के विकास और नक्सलवाद के मुद्दे को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानती है। सरकार का तर्क है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ ही उन क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है, जहां पहले हिंसा और नक्सली गतिविधियों के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होते थे।

सरकार की ओर से बस्तर में सड़क कनेक्टिविटी, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य सरकारी सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय लगातार यह बात कहते रहे हैं कि बस्तर में स्थायी शांति और विकास के लिए सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास भी जरूरी है।

ऐसे में अलग बस्तर राज्य की मांग पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का ताजा बयान राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जहां इस मांग को खारिज करते हुए इसे विकास विरोधी बताया है, वहीं बस्तर में सरकार की प्राथमिकता विकास और नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई को बताया है।

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