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Chaitra Navratri: डोली में सवार होकर आएंगी मातारानी, हाथी पर होगा प्रस्थान—जानिए क्या हैं संकेत…

शक्ति उपासना का पावन पर्व Chaitra Navratri इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस बार नवरात्रि कई खास ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार माता दुर्गा का आगमन डोली पर और गमन हाथी पर होगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

डोली पर आगमन का क्या अर्थ

ज्योतिष परंपरा के अनुसार जब नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से होती है तो माता का आगमन डोली (पालकी) पर माना जाता है।

मान्यता है कि डोली पर आगमन:

  • समाज में संघर्ष या चुनौतियों का संकेत देता है
  • लोगों को सतर्क रहने का संदेश देता है
  • पूजा-पाठ और भक्ति से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है

हालांकि धार्मिक मान्यता के अनुसार सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर देवी की कृपा से संकट टल सकते हैं।

हाथी पर होगा माता का गमन

इस बार नवरात्रि के अंत में देवी का प्रस्थान हाथी पर होगा।

हाथी पर गमन को बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह संकेत देता है:

  • अच्छी वर्षा
  • बेहतर कृषि उत्पादन
  • आर्थिक समृद्धि
  • सुख-शांति और खुशहाली

इस कारण ज्योतिषाचार्य इसे देश और समाज के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

72 साल बाद बन रहा खास संयोग

जानकारी के अनुसार करीब 72 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब अमावस्या तिथि के प्रभाव में ही कलश स्थापना की जाएगी।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक:

  • नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी
  • पर्व 27 मार्च तक चलेगा
  • प्रतिपदा तिथि के क्षय होने के बावजूद नवरात्रि पूरे 9 दिन की ही रहेगी

यह संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से काफी फलदायी माना जा रहा है।

19 मार्च को कलश स्थापना का समय

हिंदू पंचांग के अनुसार 19 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सुबह 6:52 बजे से शुरू होगी। लेकिन सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण उसी समय शास्त्रों के अनुसार घट स्थापना का विधान रहेगा।

कलश स्थापना के दो शुभ मुहूर्त बताए गए हैं:

  • सुबह 6:02 से 8:40 बजे तक – श्रेष्ठ मुहूर्त
  • सुबह 9:16 से 10:56 बजे तक – दूसरा शुभ मुहूर्त

इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

विशेष योग भी बनेंगे

इस दिन तीन शुभ योगों का भी संयोग रहेगा:

  • शुक्ल योग
  • ब्रह्म योग
  • सर्वार्थ सिद्धि योग

धार्मिक मान्यता के अनुसार इन योगों में की गई पूजा, जप और साधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

डोंगरगढ़ में रहेंगी विशेष व्यवस्थाएं

नवरात्रि के दौरान Maa Bamleshwari Temple में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी दुर्ग के Anjora से लेकर Dongargarh तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सेवा पंडाल लगाए जाएंगे।

मंदिर ट्रस्ट, सेवादार और जिला प्रशासन ने मिलकर:

  • श्रद्धालुओं के लिए विश्राम व्यवस्था
  • पेयजल
  • चिकित्सा सुविधा
  • सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था

जैसी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

निष्कर्ष:
इस बार चैत्र नवरात्रि कई दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों के साथ आ रही है। माता का आगमन डोली पर और गमन हाथी पर होना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चुनौतियों के साथ-साथ समृद्धि और सुखद भविष्य का संकेत माना जा रहा है।

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