
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान का उल्लेख करते हुए इसे एक दूरदर्शी कदम बताया। इस अभियान के तहत देशभर में मौजूद प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है, ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके और डिजिटल माध्यम से आम लोगों तक उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से इतिहास, साहित्य, विज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष और अन्य विषयों से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित किया जाएगा। इससे न केवल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को नया जीवन मिलेगा, बल्कि शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।
मुख्यमंत्री साय ने नागरिकों से अपील की कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल ऐप पर उसका विवरण दर्ज करें। इससे वे सीधे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बन सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों की छोटी-सी पहल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। जनभागीदारी के जरिए छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर सुरक्षित रूप से भविष्य तक पहुंच सकेगी।
अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़ते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को सहेजने में योगदान दें।



