छत्तीसगढ़
बस्तर में माओवादियों की उलटी गिनती: सिर्फ 5 अंडरग्राउंड, सरेंडर या कार्रवाई का आखिरी मौका..

Bastar में माओवाद को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं। सुरक्षा बलों के लगातार अभियान और आत्मसमर्पण नीति के चलते अब माओवादियों का नेटवर्क लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। हालांकि, अभी भी कुछ कट्टर माओवादी हथियार डालने को तैयार नहीं हैं।

🔻 माओवादियों की संख्या में बड़ी गिरावट
- हाल ही में माओवादी कमांडर पापाराव (जगदलपुर) और
People’s Liberation Guerrilla Army (PLGA) से जुड़े इंचार्ज सोढ़ी केसा (तेलंगाना) के आत्मसमर्पण के बाद
सक्रिय माओवादियों की संख्या में तेजी से कमी आई है - पहले जहां बड़ी संख्या में कैडर सक्रिय थे, अब यह घटकर गिने-चुने लोगों तक सीमित रह गई है
⚠️ अभी भी 5 कट्टर माओवादी अंडरग्राउंड
- तेलंगाना मूल के माओवादियों की संख्या
- 2024 में: करीब 125
- अब: केवल 5
- इनमें कुछ बड़े नाम शामिल हैं जैसे:
- गणपति
- महिला माओवादी रूपी (कांकेर-नारायणपुर बॉर्डर पर सक्रिय)
👉 ये सभी अब भी अंडरग्राउंड रहकर गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।
🚨 आईजी का सख्त संदेश
Sundarraj P (बस्तर IG) ने साफ कहा:
- Bijapur, Sukma, Narayanpur और Kanker बॉर्डर में अब बहुत कम माओवादी बचे हैं
- मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी मौका है
- अगर अब भी आत्मसमर्पण नहीं किया गया, तो
👉 सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तेज होगी
📢 तेलंगाना DGP की अपील
Shivadhar Reddy ने भी माओवादियों से कहा:
- हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करें
- सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लें
🧭 स्थिति का निष्कर्ष
- बस्तर में माओवाद का ढांचा लगभग ढह चुका है
- ज्यादातर माओवादी या तो मारे गए, या आत्मसमर्पण कर चुके हैं
- अब बचे हुए माओवादी दो विकल्पों के बीच हैं:
- आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें
- या फिर सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई का सामना करें
📝 आसान भाषा में समझें
👉 माओवादी अब लगभग खत्म हो चुके हैं
👉 सिर्फ 5 हार्डकोर सदस्य बचे हैं
👉 सरकार ने आखिरी मौका दिया है
👉 आगे या तो सरेंडर होगा या एनकाउंटर



