बस्तर में अंतिम चरण में पहुंचीं ऐतिहासिक गोंचा महापर्व की तैयारियां, 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा…

बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान माने जाने वाले ऐतिहासिक गोंचा महापर्व की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सदियों पुरानी इस परंपरा को लेकर पूरे जगदलपुर और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। हर वर्ष की तरह इस बार भी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस अनूठे आयोजन को देखने बस्तर पहुंचते हैं। प्रशासन और मंदिर समिति भी आयोजन को लेकर सभी आवश्यक तैयारियों में जुटी हुई है।

चंदन यात्रा से हुआ महापर्व का शुभारंभ
गोंचा महापर्व का विधिवत शुभारंभ पारंपरिक चंदन यात्रा के साथ हो चुका है। इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद अब मुख्य आयोजन की तैयारियां तेज गति से चल रही हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर और सिरहासार भवन परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
तैयार हो रहा 32 फीट ऊंचा विशाल रथ
सिरहासार भवन परिसर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए लगभग 32 फीट ऊंचे विशाल लकड़ी के रथ का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
कारीगर दिन-रात मेहनत कर रथ को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। रथ के चारों विशाल पहिए तैयार हो चुके हैं और अब रथ की सजावट, नक्काशी और अन्य कार्य पूरे किए जा रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी पारंपरिक शैली में रथ तैयार किया जा रहा है।
मंदिर और सिरहासार भवन को सजाया जा रहा
श्री जगन्नाथ मंदिर और सिरहासार भवन में रंग-रोगन, साफ-सफाई और आकर्षक सजावट का कार्य अंतिम दौर में है। परिसर को फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक सजावट से भव्य रूप दिया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो सके।
15 जुलाई को होगा नेत्रोत्सव
महापर्व के तहत 15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का नेत्रोत्सव मनाया जाएगा। इस विशेष धार्मिक परंपरा में भगवान के नेत्रों का पूजन किया जाता है और उन्हें सार्वजनिक दर्शन के लिए तैयार किया जाता है।
यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है और बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं।
16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर श्री जगन्नाथ मंदिर से सिरहासार भवन के लिए प्रस्थान करेंगे।
इस दौरान हजारों श्रद्धालु रस्सी खींचकर भगवान के रथ को आगे बढ़ाएंगे। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजन-कीर्तन, लोकनृत्य और जयघोष के बीच पूरी रथयात्रा धार्मिक आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगी।
रथयात्रा के बाद भगवान सिरहासार भवन में विराजमान होंगे, जहां नौ दिनों तक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
619 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा
गोंचा महापर्व का इतिहास लगभग 619 वर्ष पुराना माना जाता है। बस्तर रियासत के समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा, भव्यता और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जा रही है।
समय के साथ इस महापर्व की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है और यह बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।
बस्तर की संस्कृति का अनूठा उत्सव
गोंचा महापर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। इस दौरान स्थानीय लोक कलाकार, आदिवासी समुदाय और विभिन्न सांस्कृतिक दल अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।
देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक
हर वर्ष इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अलावा देश के कई राज्यों और विदेशों से भी पर्यटक बस्तर पहुंचते हैं। गोंचा महापर्व बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का माध्यम बन चुका है।
इस वर्ष भी प्रशासन, मंदिर समिति और स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक महापर्व में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बनेंगे।



