छत्तीसगढ़

अब कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को मिलेगी सिर्फ 20% गैस, सरकार ने तय की सप्लाई प्राथमिकता….

रायपुर। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और गैस आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने कमर्शियल एलपीजी (LPG) को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब प्रदेश के कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं—जैसे होटल, रेस्टोरेंट, कैंटीन, संस्थान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों—को बीते महीने की कुल खपत का अधिकतम 20 प्रतिशत ही एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।

यह फैसला राज्य में गैस की सीमित उपलब्धता, बढ़ती मांग और वितरण व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि जरूरी सेवाओं पर असर कम से कम पड़े।


क्यों लिया गया यह फैसला?

दरअसल, मध्य पूर्व संकट का असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहा है। इसके कारण कई राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी कमर्शियल LPG की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। इसी स्थिति को देखते हुए खाद्य विभाग ने ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर मौजूदा स्टॉक, सप्लाई और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की।

सरकार की कोशिश है कि कम गैस उपलब्ध होने की स्थिति में पहले जरूरी संस्थानों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रभावित न हों।


क्या है सरकार का नया आदेश?

बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार:

1) कमर्शियल उपभोक्ताओं को केवल 20% गैस

अब किसी भी कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ता को पिछले महीने जितनी गैस खपत हुई थी, उसका अधिकतम 20 प्रतिशत ही सिलेंडर दिया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर:

  • यदि किसी होटल ने पिछले महीने 100 सिलेंडर उपयोग किए थे,
  • तो अब उसे फिलहाल अधिकतम 20 सिलेंडर ही मिल पाएंगे।

इसका सीधा असर बड़े होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग यूनिट, कैंटीन और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है।


2) ऑनलाइन बुकिंग की समय-सीमा तय

उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने बुकिंग विंडो भी तय की है:

  • शहरी क्षेत्रों में: 25 दिन के भीतर रिफिल बुकिंग सुविधा
  • ग्रामीण क्षेत्रों में: 45 दिन के भीतर रिफिल बुकिंग सुविधा

इसका उद्देश्य यह है कि गैस वितरण को नियंत्रित और चरणबद्ध तरीके से किया जाए, ताकि एक साथ अधिक मांग आने से अव्यवस्था न फैले


3) सुरक्षा व्यवस्था भी होगी सख्त

गैस की सीमित उपलब्धता के कारण वितरकों के कार्यालय और गोदामों में भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन को क्या करना होगा?

  • सभी LPG वितरकों के ऑफिस और गोदामों में सुरक्षा व्यवस्था
  • जरूरत पड़ने पर पुलिस और होमगार्ड की तैनाती
  • भीड़, धक्का-मुक्की और अव्यवस्था रोकने के उपाय

सरकार चाहती है कि गैस वितरण के दौरान किसी तरह की अफरा-तफरी या विवाद की स्थिति न बने


4) वितरकों को दिए गए सख्त निर्देश

बैठक में LPG डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी कई स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:

  • अपने फोन नंबर हमेशा चालू रखें
  • उपभोक्ताओं की शिकायतों का तुरंत समाधान करें
  • गैस वितरण में पारदर्शिता बनाए रखें
  • उपलब्ध स्टॉक के अनुसार प्राथमिकता सूची के आधार पर सप्लाई करें

यानी अब मनमाने तरीके से सिलेंडर वितरण की गुंजाइश कम होगी और सप्लाई पर निगरानी बढ़ेगी।


किन्हें मिलेगी पहले गैस? सरकार ने तय की प्राथमिकता सूची

गैस की सीमित उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने यह भी तय किया है कि सबसे पहले किन संस्थानों को एलपीजी दी जाएगी। इसे प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया है।

प्राथमिकता श्रेणी में शामिल संस्थान

सरकार ने जिन संस्थानों को जरूरी श्रेणी में रखा है, उनमें शामिल हैं:

1) शैक्षणिक संस्थान

  • स्कूल
  • कॉलेज
  • छात्रावास
  • आवासीय शिक्षण संस्थान

इन जगहों पर बच्चों और छात्रों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसलिए इन्हें प्राथमिकता दी गई है।

2) चिकित्सालय और स्वास्थ्य संस्थान

  • सरकारी अस्पताल
  • निजी अस्पताल
  • नर्सिंग होम
  • स्वास्थ्य केंद्र

अस्पतालों में मरीजों के भोजन, कैंटीन और आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इन्हें उच्च प्राथमिकता दी गई है।

3) सैन्य और अर्द्धसैन्य कैंप

  • सेना से जुड़े कैंप
  • अर्द्धसैनिक बलों के शिविर

सुरक्षा से जुड़े इन संस्थानों में भोजन व्यवस्था बाधित न हो, इसलिए इन्हें प्राथमिक श्रेणी में रखा गया है।

4) जेल

जेलों में बड़ी संख्या में बंदियों के भोजन की व्यवस्था प्रतिदिन होती है, इसलिए गैस आपूर्ति यहां भी जरूरी मानी गई है।

5) समाज कल्याण विभाग के संस्थान

  • बाल गृह
  • महिला संरक्षण गृह
  • आश्रय गृह
  • सामाजिक संस्थान

इन संस्थानों में आश्रित लोगों के लिए भोजन व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है।

6) रेलवे और एयरपोर्ट कैंटीन

यात्रियों की सुविधा और सार्वजनिक सेवाओं को बनाए रखने के लिए रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन को भी प्राथमिकता दी गई है।

7) शासकीय कार्यालय और गेस्ट हाउस

सरकारी कार्यालयों और अतिथि गृहों में भी सीमित लेकिन आवश्यक गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

8) पशु आहार उत्पादक इकाइयां

यह श्रेणी थोड़ी अलग जरूर है, लेकिन सरकार ने इन्हें भी आवश्यक आपूर्ति सूची में रखा है।

9) होटल और रेस्टोरेंट

हालांकि होटल-रेस्टोरेंट को प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है, लेकिन इन्हें उपलब्ध स्टॉक और नियंत्रित कोटे के आधार पर ही गैस मिलेगी।


किस पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?

इस फैसले का सबसे अधिक असर निम्न वर्गों पर पड़ सकता है:

  • बड़े होटल
  • रेस्टोरेंट
  • कैटरर्स
  • ढाबे
  • फूड कोर्ट
  • इंडस्ट्रियल किचन
  • बड़ी कैंटीन सेवाएं

इन संस्थानों को अब:

  • मेन्यू सीमित करना पड़ सकता है
  • ऑपरेशन कम करना पड़ सकता है
  • भोजन उत्पादन घटाना पड़ सकता है
  • वैकल्पिक ईंधन या कुकिंग व्यवस्था पर विचार करना पड़ सकता है

आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए क्या मतलब है?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फैसला फिलहाल कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं के लिए है।
यानी इसका सीधा असर घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर नहीं बताया गया है।

हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय संकट और गहराता है, तो आने वाले दिनों में:

  • बुकिंग समय बढ़ सकता है
  • सप्लाई चक्र प्रभावित हो सकता है
  • वितरण पर अतिरिक्त नियंत्रण लगाया जा सकता है

इसलिए सरकार फिलहाल व्यावसायिक खपत को सीमित करके घरेलू और जरूरी सेवाओं की आपूर्ति बचाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।


दैनिक मॉनिटरिंग का फैसला

बैठक में यह भी तय किया गया कि:

अब हर दिन होगी स्टॉक और वितरण की समीक्षा

  • ऑयल कंपनियां रोजाना कमर्शियल LPG स्टॉक की समीक्षा करेंगी
  • प्रतिदिन वितरण की स्थिति की रिपोर्ट विभाग को देंगी
  • किस जिले में कितनी गैस उपलब्ध है, इस पर निगरानी रखी जाएगी

इससे सरकार को यह पता चलता रहेगा कि:

  • किस क्षेत्र में संकट ज्यादा है
  • किसे प्राथमिकता से सप्लाई देनी है
  • कहां अतिरिक्त नियंत्रण की जरूरत है

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

इस अहम समीक्षा बैठक में खाद्य विभाग और तेल कंपनियों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

  • खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहब कंगाले
  • खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम
  • छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव राजीव कुमार जायसवाल
  • इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के मंडल एलपीजी प्रमुख श्रीपाद बक्षी
  • भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के प्रादेशिक प्रबंधक दिलीप मीणा
  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक मंगेश डोंगरे
  • तथा अन्य संबंधित अधिकारी

सरकार का मकसद क्या है?

सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है:

“कम स्टॉक में जरूरी सेवाओं को पहले बचाना”

यानी अगर गैस सीमित है, तो पहले:

  • अस्पताल चलें
  • स्कूल/छात्रावास चलें
  • सुरक्षा संस्थान प्रभावित न हों
  • सार्वजनिक सेवाएं बनी रहें

और उसके बाद शेष गैस को नियंत्रित तरीके से अन्य व्यावसायिक संस्थानों तक पहुंचाया जाए।


निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में कमर्शियल LPG को लेकर लिया गया यह फैसला साफ संकेत देता है कि सरकार गैस संकट को गंभीरता से लेते हुए आपूर्ति प्रबंधन मोड में आ चुकी है
अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि:

  • गैस की उपलब्धता कितनी सुधरती है,
  • होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर पर इसका कितना असर पड़ता है,
  • और आम उपभोक्ताओं तक सप्लाई कितनी सहज बनी रहती है।

अगर मध्य पूर्व संकट लंबा खिंचता है, तो LPG वितरण पर और कड़े कदम भी देखने को मिल सकते हैं।

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