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भुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में वापसी के पीछे हैं ये 5 बड़ी वजहें, क्या 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी शुरू हो गई?

Sports Desk: भारतीय क्रिकेट में कुछ वापसी ऐसी होती हैं, जो सिर्फ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं होतीं, बल्कि पूरी टीम की रणनीति का संकेत देती हैं। करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार का टीम इंडिया में लौटना भी कुछ ऐसा ही माना जा रहा है। 37वें साल की उम्र में भारतीय टीम में जगह बनाने वाले भुवी ने एक बार फिर साबित किया है कि फिटनेस और लगातार प्रदर्शन के दम पर उम्र की दीवार को चुनौती दी जा सकती है।

भुवनेश्वर ने भारत के लिए करीब 3 साल 10 महीने पहले आखिरी मुकाबला खेला था। इसके बाद उन्होंने टीम से बाहर रहते हुए घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में खुद को लगातार साबित किया। अब न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 टीम में उनकी वापसी ने अगले साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों को लेकर भी चर्चाएं तेज कर दी हैं।

भुवी की वापसी के पीछे सिर्फ उनका हालिया प्रदर्शन नहीं, बल्कि टीम इंडिया की मौजूदा गेंदबाजी जरूरतें भी बड़ी वजह मानी जा रही हैं। उनके बचपन के कोच संजय रस्तोगी और पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर एवं कोच विपिन वत्स ने भी उनकी वापसी को लेकर अपनी राय रखी है।

1. बुमराह की फिटनेस बनी सबसे बड़ी चिंता

जसप्रीत बुमराह पिछले कुछ समय से लगातार चोट की समस्या से जूझते रहे हैं। टीम इंडिया के लिए वह सबसे अहम तेज गेंदबाज हैं, लेकिन उनकी फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट हमेशा चर्चा का विषय रहा है।

ऐसे में अगले साल के वर्ल्ड कप को देखते हुए चयनकर्ताओं को एक ऐसे अनुभवी तेज गेंदबाज की जरूरत है, जिस पर बड़े मुकाबलों में भरोसा किया जा सके। भुवनेश्वर का अनुभव और नई गेंद से स्विंग कराने की क्षमता उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत विकल्प बनाती है।

भुवी के बचपन के कोच संजय रस्तोगी का मानना है कि करीब चार साल बाद टीम में बुलावा अपने आप में बड़ा संकेत है। उनके मुताबिक, चयनकर्ताओं ने भुवनेश्वर को दोबारा मौका दिया है तो इसके पीछे निश्चित तौर पर कोई ठोस योजना होगी।

2. मोहम्मद शमी की स्थिति ने बढ़ाई मुश्किल

मोहम्मद शमी ने 2023 वनडे वर्ल्ड कप में शानदार गेंदबाजी करते हुए भारत को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, चोट से वापसी के बाद वह पहले जैसी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखाई दिए।

शमी की फिटनेस और लगातार लंबे स्पेल करने की क्षमता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के सामने एक अनुभवी बैकअप तेज गेंदबाज की जरूरत और ज्यादा महसूस हुई।

यहीं भुवनेश्वर कुमार का अनुभव काम आ सकता है। नई गेंद से स्विंग, सीम और शुरुआती विकेट निकालने की उनकी क्षमता लंबे समय से उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है।

3. युवाओं में कोई नहीं बना पक्का विकल्प

भुवनेश्वर के टीम से बाहर होने के बाद भारतीय चयनकर्ताओं ने कई युवा तेज गेंदबाजों को आजमाया। अर्शदीप सिंह, आवेश खान, दीपक चाहर, उमरान मलिक, मुकेश कुमार, मयंक यादव, हर्षित राणा, कुलदीप सेन और तुषार देशपांडे जैसे गेंदबाजों को अलग-अलग मौकों पर टीम में जगह मिली।

इनमें कुछ खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कोई भी लंबे समय के लिए ऐसा भरोसेमंद विकल्प नहीं बन सका, जिसे वर्ल्ड कप जैसी बड़ी प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार माना जाए।

भुवनेश्वर के दूसरे कोच विपिन वत्स का कहना है कि अगर 36-37 साल की उम्र में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों को प्रदर्शन के आधार पर मौका दिया जा सकता है, तो लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले भुवनेश्वर को उम्र के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

वत्स के मुताबिक, भुवनेश्वर का शांत स्वभाव और शानदार टेम्परामेंट भी उनकी बड़ी ताकत है। वह दबाव की स्थिति में भी अपना संतुलन बनाए रखते हैं।

4. IPL में लगातार बढ़ा भुवी का प्रदर्शन

टीम इंडिया से बाहर होने के बाद भुवनेश्वर ने हार नहीं मानी। आईपीएल में उनका प्रदर्शन लगातार इस बात का सबूत देता रहा कि उनकी गेंदबाजी में अभी काफी दम बाकी है।

2023 में उन्होंने 16 विकेट लिए। 2024 में उनके खाते में 11 विकेट आए, लेकिन इसके बाद 2025 में उन्होंने फिर 17 विकेट झटके। इस सीजन में तो भुवनेश्वर ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित कर दिया और 28 विकेट लेकर टूर्नामेंट के सबसे सफल गेंदबाजों में जगह बनाई।

खास बात यह रही कि भारतीय पिचों पर बल्लेबाजों के लिए मददगार परिस्थितियों के बावजूद भुवी ने अपनी स्विंग और सीम का प्रभाव बरकरार रखा।

कोच संजय रस्तोगी के अनुसार, टीम से बाहर रहने के दौरान भुवनेश्वर ने लगातार अपनी फिटनेस और खेल पर काम किया। उनके मुताबिक, इस साल आईपीएल का प्रदर्शन ही वह वजह बना, जिसने चयनकर्ताओं को एक बार फिर उनकी तरफ देखने पर मजबूर कर दिया।

5. वर्ल्ड कप से पहले अनुभव की जरूरत

अगले साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियां अब शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बुमराह के अलावा तेज गेंदबाजी आक्रमण में कौन अनुभवी चेहरा होगा।

युवा खिलाड़ियों को मौके दिए गए, लेकिन किसी को भी पूरी तरह स्थापित विकल्प नहीं माना जा सका। दूसरी ओर, भुवनेश्वर ने इस साल आईपीएल में अपनी गेंदबाजी से दिखाया कि उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी स्विंग और सीम में कोई बड़ी कमी नहीं आई है।

दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे की परिस्थितियों में गेंद को हवा में स्विंग कराने वाले गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। ऐसे में भुवनेश्वर की क्षमता भारतीय टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

विपिन वत्स का मानना है कि अगर भुवनेश्वर फिट रहते हैं और मौजूदा लय को बरकरार रखते हैं, तो वह अगले साल वर्ल्ड कप में भारत के लिए बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

उम्र नहीं, प्रदर्शन बना भुवी की वापसी का आधार

भुवनेश्वर कुमार की वापसी यह संदेश भी देती है कि भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए उम्र से ज्यादा मौजूदा प्रदर्शन और फिटनेस को महत्व दिया जा रहा है। करीब चार साल तक टीम से बाहर रहने के बाद उन्होंने आईपीएल में दमदार प्रदर्शन किया और चयनकर्ताओं को अपने बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया।

अब न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 टीम में उनकी वापसी को सिर्फ एक सीरीज का मौका माना जाए या वर्ल्ड कप की बड़ी रणनीति का हिस्सा, यह आने वाले मुकाबलों में साफ होगा। लेकिन इतना जरूर है कि भुवी की वापसी ने भारतीय तेज गेंदबाजी में एक अनुभवी और भरोसेमंद विकल्प जरूर जोड़ दिया है।

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