CG News: नए आपराधिक कानूनों से डिजिटल न्याय व्यवस्था होगी मजबूत, रायपुर में 2 अगस्त को राज्य स्तरीय कार्यशाला; CM साय होंगे मुख्य अतिथि…..

रायपुर, 1 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से और अधिक मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम पहल होने जा रही है। 2 अगस्त 2026 को रायपुर में ‘नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना’ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
यह कार्यशाला रायपुर के होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में आयोजित होगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।
कार्यशाला का उद्देश्य नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करना है, ताकि न्याय व्यवस्था को तेज, सरल, सुगम, पारदर्शी और आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सके।

CM साय होंगे मुख्य अतिथि, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा करेंगे अध्यक्षता
राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा करेंगे।
कार्यक्रम में प्रदेश के गृह एवं पुलिस प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ न्यायपालिका के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
विशिष्ट अतिथियों के तौर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेन्द्र यादव तथा न्यायमूर्ति चंद्रवंशी शामिल होंगे।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर के अन्य न्यायाधीश भी कार्यशाला में सहभागी होंगे।
पुलिस और न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल
कार्यशाला में केवल न्यायिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की पुलिस और अभियोजन व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
इसमें:
- न्यायिक सेवा के अधिकारी
- सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP)
- पुलिस महानिरीक्षक (IG)
- पुलिस महानिदेशक (DGP)
- पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
- न्यायिक तंत्र से जुड़े अधिकारी
भाग लेंगे।
इसका उद्देश्य न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन तंत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि नए आपराधिक कानूनों को लागू करते समय तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की बाधा न आए।
डिजिटल तकनीक से बदलेगी न्याय प्रक्रिया
कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर रहेगा कि डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करके न्यायिक प्रक्रिया को किस तरह अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद जांच, साक्ष्य, दस्तावेज, केस की निगरानी और न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
ऐसे में पुलिस, अभियोजन और न्यायपालिका के बीच डिजिटल माध्यम से सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान होने से मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
ICJS पर होगा विशेष मंथन
कार्यशाला में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) यानी अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली प्रमुख विषयों में शामिल होगी।
ICJS का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े अलग-अलग संस्थानों को डिजिटल माध्यम से जोड़ना है। इससे पुलिस, अदालत, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच आवश्यक जानकारी का आदान-प्रदान अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।
कार्यशाला में ICJS के प्रभावी उपयोग और नए आपराधिक कानूनों के साथ इसके तकनीकी एकीकरण पर विस्तार से चर्चा होगी।
CCTNS पर भी होगी चर्चा
कार्यशाला में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) पर भी विशेष चर्चा होगी।
CCTNS पुलिस व्यवस्था को डिजिटल बनाने की महत्वपूर्ण प्रणाली है। इसके माध्यम से अपराध और अपराधियों से संबंधित जानकारी को डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड और ट्रैक करने में मदद मिलती है।
कार्यशाला में CCTNS को नए आपराधिक कानूनों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने और पुलिस की जांच प्रक्रिया को अधिक तकनीक आधारित बनाने पर मंथन होगा।
डिजिटल न्यायिक समन्वय पर भी फोकस
कार्यशाला का एक प्रमुख विषय डिजिटल न्यायिक समन्वय भी रहेगा।
न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन के बीच मामलों से जुड़ी जानकारी समय पर उपलब्ध होना न्याय प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। डिजिटल सिस्टम के माध्यम से इन संस्थाओं के बीच समन्वय बेहतर होने से दस्तावेजों और सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी आ सकती है।
इससे मामलों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
नए आपराधिक कानूनों में तकनीकी एकीकरण
कार्यशाला में नए आपराधिक कानूनों के तहत तकनीकी एकीकरण से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
नए कानूनों में डिजिटल तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से जुड़े कई पहलुओं को महत्व दिया गया है। ऐसे में पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए यह जरूरी है कि वे तकनीकी प्रक्रियाओं को सही तरीके से समझें और उनका प्रभावी उपयोग करें।
इसी उद्देश्य से कार्यशाला में अधिकारियों को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाएगा।
NIC और NCRB के विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण
कार्यशाला में तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञ जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
ये विशेषज्ञ अधिकारियों को डिजिटल न्याय प्रणाली से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी देंगे और संबंधित प्रणालियों पर प्रस्तुतीकरण भी देंगे।
इस दौरान नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में डिजिटल सिस्टम की भूमिका और तकनीकी चुनौतियों पर भी चर्चा की जाएगी।
पुलिस-ज्यूडिशियरी के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
अपराध की सूचना मिलने से लेकर जांच, चार्जशीट, अभियोजन और न्यायालय में सुनवाई तक कई संस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। ऐसे में यदि इनके बीच सूचना का आदान-प्रदान तेज और व्यवस्थित हो तो न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है।
डिजिटल व्यवस्था इस समन्वय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नागरिकों को मिलेगा तेज और सुलभ न्याय
राज्य स्तरीय कार्यशाला का अंतिम उद्देश्य केवल तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करना नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाना है।
डिजिटल तकनीकों के बेहतर इस्तेमाल से न्याय व्यवस्था में:
- समय की बचत
- पारदर्शिता में बढ़ोतरी
- रिकॉर्ड का बेहतर प्रबंधन
- पुलिस-जांच में तेजी
- न्यायिक प्रक्रिया में बेहतर समन्वय
- नागरिकों को अधिक सुलभ न्याय
जैसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में अहम कदम
छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाली यह कार्यशाला नए आपराधिक कानूनों को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एक ही मंच पर न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन और तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और तकनीकी चुनौतियों को समझने का अवसर मिलेगा।
कार्यशाला की मुख्य बातें
- तारीख: 2 अगस्त 2026
- स्थान: होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, VIP रोड, रायपुर
- मुख्य अतिथि: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
- अध्यक्षता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा
- प्रमुख विषय: डिजिटल न्याय व्यवस्था और नए आपराधिक कानून
- मुख्य तकनीकी सिस्टम: ICJS और CCTNS
- अन्य विषय: डिजिटल न्यायिक समन्वय और तकनीकी एकीकरण
- विशेषज्ञ: NIC और NCRB के वरिष्ठ अधिकारी
- प्रतिभागी: न्यायिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, SP, IG, DGP सहित वरिष्ठ अधिकारी
कुल मिलाकर, रायपुर में होने वाली यह राज्य स्तरीय कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस और अभियोजन तंत्र को डिजिटल रूप से एकीकृत करने तथा नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में अहम पहल साबित हो सकती है। तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।



