
मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में भारी बारिश के बाद एक सरकारी स्कूल परिसर में जलभराव और कीचड़ की स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम नेवासपुर स्थित माध्यमिक शाला में बारिश के बाद परिसर में पानी भर गया और चारों ओर कीचड़ फैल गया। इससे स्कूल पहुंचने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। वहीं, मामले की जानकारी मिलते ही मुंगेली कलेक्टर कुन्दन कुमार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रशासन ने स्कूल की स्थिति की जानकारी समय पर जिला स्तर तक नहीं पहुंचाने को गंभीर लापरवाही माना है। इस मामले में BEO समेत तीन जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
नेवासपुर के स्कूल में बारिश के बाद बिगड़े हालात
मामला मुंगेली जिले के ग्राम नेवासपुर की माध्यमिक शाला का है। बताया गया कि पिछले सप्ताह लगातार हुई बारिश के बाद स्कूल परिसर में पानी जमा हो गया।
विद्यालय के आसपास का क्षेत्र लो-लाइन में होने के कारण बारिश का पानी आसानी से बाहर नहीं निकल पाया। पानी जमा होने के बाद परिसर में कीचड़ फैल गया, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत हुई।
बारिश के बाद स्कूल परिसर की स्थिति का वीडियो या तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा
स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर इंडियन नेशनल कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस ने पोस्ट में उपमुख्यमंत्री के गृह जिले का हवाला देते हुए स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बच्चों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार एक ओर विकास के दावे कर रही है, लेकिन दूसरी ओर बारिश के बाद बच्चों को स्कूल परिसर में कीचड़ और जलभराव के बीच परेशानी उठानी पड़ रही है।
इस पोस्ट के सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद प्रशासन हरकत में आया
मामला सामने आने के बाद मुंगेली कलेक्टर कुन्दन कुमार ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को मामले की तत्काल जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने सिर्फ स्कूल परिसर में जलभराव की स्थिति को ही मुद्दा नहीं माना, बल्कि यह भी जांच का विषय बनाया कि समस्या की जानकारी समय रहते जिला प्रशासन तक क्यों नहीं पहुंचाई गई।
कलेक्टर ने इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
BEO समेत तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
मामले में कलेक्टर ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) विमित्रा घृतलहरे, विद्यालय के प्रधान पाठक और संबंधित संकुल समन्वयक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की ओर से माना गया कि विद्यालय में उत्पन्न समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी या होनी चाहिए थी, लेकिन इसकी सूचना समय पर जिला प्रशासन तक नहीं पहुंचाई गई।
अब नोटिस के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा कि आखिर स्कूल की स्थिति की जानकारी समय पर क्यों नहीं दी गई और समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए गए।
लो-लाइन क्षेत्र होने से जमा हुआ पानी
प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, नेवासपुर का माध्यमिक विद्यालय लो-लाइन क्षेत्र में स्थित है। ऐसे इलाकों में भारी बारिश के दौरान पानी जमा होने की संभावना अधिक रहती है।
पिछले सप्ताह लगातार हुई बारिश के कारण स्कूल परिसर में पानी भर गया। पानी निकलने के बाद भी परिसर में काफी मात्रा में कीचड़ जमा हो गया, जिसके चलते बच्चों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हालांकि, प्रशासन का मुख्य सवाल यह है कि जब स्कूल में ऐसी स्थिति बनी तो संबंधित शिक्षा अधिकारियों को इसकी जानकारी समय रहते जिला स्तर पर क्यों नहीं दी गई।
बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं: कलेक्टर
कलेक्टर कुन्दन कुमार ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा, स्वच्छता और बेहतर शैक्षणिक वातावरण से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। यदि किसी विद्यालय में ऐसी समस्या उत्पन्न होती है तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचानी होगी।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी दिए जा चुके हैं नियमित निरीक्षण के निर्देश
प्रशासन के अनुसार, कलेक्टर पहले ही शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठकों में अधिकारियों को स्कूलों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दे चुके हैं।
इन बैठकों में:
- सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों
- संकुल समन्वयकों
- विद्यालय प्रमुखों
को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे।
इसके अलावा किसी भी विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्या, भवन संबंधी परेशानी, जलभराव या अन्य दिक्कत सामने आने पर तत्काल जिला प्रशासन को जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए थे।
समय पर सूचना नहीं मिलने पर कलेक्टर नाराज
नेवासपुर स्कूल में जलभराव और कीचड़ की स्थिति की जानकारी जिला प्रशासन तक समय पर नहीं पहुंचने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई है।
प्रशासन का मानना है कि यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते स्कूल की स्थिति की जानकारी दी जाती तो समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाए जा सकते थे।
इसी वजह से अब BEO, प्रधान पाठक और संकुल समन्वयक से जवाब मांगा जा रहा है।
बारिश के मौसम में स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल
मुंगेली की यह घटना बारिश के मौसम में ग्रामीण और निचले इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है।
भारी बारिश के दौरान स्कूल परिसर में जलभराव होने से न केवल विद्यार्थियों के आवागमन में परेशानी होती है, बल्कि फिसलने, संक्रमण और अन्य सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।
ऐसे में प्रशासन की ओर से स्कूलों की स्थिति की नियमित निगरानी और समस्याओं की तत्काल रिपोर्टिंग पर जोर दिया जा रहा है।
मामले में अब क्या होगा?
- DEO द्वारा मामले की जांच की जाएगी।
- BEO, प्रधान पाठक और संकुल समन्वयक को नोटिस जारी किया जाएगा।
- संबंधित अधिकारियों से कारण बताओ जवाब लिया जाएगा।
- स्कूल की स्थिति और जलभराव की समस्या का परीक्षण किया जाएगा।
- जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रशासनिक कार्रवाई
नेवासपुर स्कूल का मामला अब केवल बारिश के बाद जलभराव तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस ने इसे सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने का मुद्दा बनाया है, जबकि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कलेक्टर की कार्रवाई से साफ है कि प्रशासन स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नोटिस के जवाब में संबंधित अधिकारी क्या स्पष्टीकरण देते हैं और जांच के बाद प्रशासन की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
कांग्रेस का सोशल मीडिया पोस्ट बना चर्चा का केंद्र




