राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी ‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेताओं का सम्मान, बस्तर की जनजातीय संस्कृति को मिलेगा राष्ट्रीय गौरव

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था को आज राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐतिहासिक सम्मान मिलने जा रहा है। ‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेता, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय प्रतिनिधि और पद्म सम्मान प्राप्त हस्तियां आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करेंगी। इस दौरान राष्ट्रपति स्वयं इन प्रतिनिधियों का सम्मान करेंगी। यह अवसर न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।

164 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचेगा राष्ट्रपति भवन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ से 164 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन पहुंचेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता, पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व से जुड़े प्रतिनिधि, कलाकार और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। यह दौरा राज्य की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था को मिलेगा सम्मान
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बस्तर की पारंपरिक नेतृत्व प्रणाली से जुड़े परगना मांझी, मांझी और चालकी जैसे प्रतिनिधियों का विशेष सम्मान किया जाएगा। सदियों पुरानी यह व्यवस्था आज भी बस्तर के अनेक आदिवासी गांवों में सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार है।
इन पारंपरिक प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना इस बात का प्रतीक है कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था भी भारत की विविध जनजातीय परंपराओं और उनकी सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दे रही है।
पद्म सम्मान प्राप्त विभूतियां भी होंगी शामिल
कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित जनजातीय विभूतियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। उनके सम्मान में राष्ट्रपति भवन में एक विशेष भोज (Special Banquet) का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और जनजातीय समाज के योगदान पर भी चर्चा होगी।
क्या है बस्तर पंडुम?
बस्तर पंडुम बस्तर अंचल का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक महोत्सव है, जिसका उद्देश्य जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, लोककला, लोकनृत्य, लोकसंगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। इस आयोजन में बस्तर के विभिन्न जनजातीय समुदाय अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करते हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी नई पहचान
राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह सम्मान समारोह बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में नई पहचान दिलाने वाला साबित होगा। इससे न केवल जनजातीय समाज का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उनकी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक धरोहर को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय की पहल का परिणाम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार बस्तर की संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में कार्य कर रही है। ‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेताओं का राष्ट्रपति भवन में सम्मान इसी प्रयास की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
प्रदेश के लिए गौरव का क्षण
राष्ट्रपति भवन में बस्तर के पारंपरिक प्रतिनिधियों का सम्मान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय विरासत के सम्मान का प्रतीक है। इससे बस्तर की पहचान और मजबूत होगी तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर पर गर्व करने की प्रेरणा मिलेगी।



