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केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में 16वें दिन भी डटे अमित भटनागर, तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल रेफर, दी जल त्यागने की चेतावनी….

छतरपुर। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। परियोजना से प्रभावित आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। रविवार तड़के प्रशासन ने पुलिस बल की मदद से उनका आंदोलन समाप्त कराया और बिगड़ती तबीयत के कारण उन्हें पहले बिजावर अस्पताल और बाद में छतरपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया।

हालांकि अस्पताल पहुंचने के बाद भी अमित भटनागर ने साफ कहा कि उनका अनशन अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती की या अनशन तुड़वाने का प्रयास किया, तो वह पानी पीना भी छोड़ देंगे, जिससे उनकी जान को और अधिक खतरा हो सकता है।

बराना नदी के बीच चल रहा था ‘सांकेतिक चिता आंदोलन’

अमित भटनागर पिछले 16 दिनों से बराना नदी के बीचों-बीच सांकेतिक चिता बनाकर आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने अन्न-जल का त्याग करते हुए यह अनशन शुरू किया था। उनका कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों को अपने घर और जमीन छोड़नी पड़ेगी, लेकिन उन्हें अभी तक न्यायसंगत मुआवजा और उचित पुनर्वास की गारंटी नहीं मिली है।

उनका आरोप है कि सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने में तेजी दिखा रही है, लेकिन प्रभावित लोगों की समस्याओं और अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।

भारी पुलिस बल के साथ हटाया गया आंदोलन

रविवार सुबह प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर आंदोलन स्थल को खाली कराया। लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने के कारण अमित भटनागर की तबीयत काफी बिगड़ चुकी थी। स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें तत्काल बिजावर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए छतरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से समर्थकों को संदेश भेजकर कहा कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और उनका अनशन समाप्त नहीं हुआ है।

बेटे की अपील भी नहीं मानी

प्रशासन ने आंदोलन समाप्त कराने के लिए कई स्तर पर प्रयास किए। अधिकारियों ने अमित भटनागर के परिजनों से बातचीत की और उनके छोटे बेटे के माध्यम से भी अनशन खत्म कराने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इन सभी प्रयासों को ठुकरा दिया कि जब तक प्रभावित आदिवासियों को न्याय, सम्मानजनक पुनर्वास और उनके अधिकारों की गारंटी नहीं मिलती, तब तक वह पीछे नहीं हटेंगे।

“जबरदस्ती की गई तो पानी भी छोड़ दूंगा”

अस्पताल में अमित भटनागर ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने जबरन उनका अनशन समाप्त कराने की कोशिश की या किसी प्रकार का दबाव बनाया, तो वह जल त्याग भी कर देंगे। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि हजारों विस्थापित परिवारों के भविष्य की लड़ाई है।

कांग्रेस ने सरकार पर लगाया दमन का आरोप

इस पूरे घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद करना चाहिए था, लेकिन उसने बातचीत के बजाय दमन का रास्ता चुना। उन्होंने प्रशासन द्वारा पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया।

क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना?

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन की सुविधाएं बढ़ाना है। हालांकि परियोजना को लेकर लंबे समय से पर्यावरण, वन क्षेत्र और बड़ी संख्या में आदिवासी एवं ग्रामीण परिवारों के विस्थापन को लेकर विवाद बना हुआ है। प्रभावित परिवार बेहतर मुआवजा, पुनर्वास और अधिकारों की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि परियोजना से क्षेत्र के विकास और जल संकट के समाधान में बड़ी मदद मिलेगी।

फिलहाल अमित भटनागर की स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों की लगातार निगरानी है, जबकि प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। उनकी ओर से जल त्यागने की चेतावनी के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

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