
राजनांदगांव जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर शिक्षक संकट से जूझ रही है। जिले के 10 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में होने वाली शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को राज्य शासन ने निरस्त कर दिया है। इससे उन 1,500 से अधिक अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने भर्ती के लिए आवेदन किया था और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे।
सालभर चली भर्ती प्रक्रिया अचानक रद्द
जानकारी के अनुसार, आत्मानंद स्कूलों में शिक्षक एवं अन्य पदों को भरने के लिए करीब दो दर्जन से अधिक पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इसके लिए करीब 1,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे।
भर्ती प्रक्रिया के तहत:
- आवेदन स्वीकार किए गए।
- पात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई।
- दस्तावेजों का सत्यापन भी पूरा हो गया।
- अभ्यर्थियों को केवल नियुक्ति आदेश (ज्वाइनिंग) मिलने का इंतजार था।
इसी बीच राज्य शासन ने आदेश जारी कर पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी। अब शासन का कहना है कि आगे से इन पदों पर भर्ती राज्य स्तर पर केंद्रीकृत प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी।
600 शिक्षकों की कमी से जूझ रहे जिले के स्कूल
आत्मानंद स्कूलों की भर्ती रद्द होने के अलावा जिले के सरकारी स्कूल भी लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।
राजनांदगांव जिले में:
- लगभग 1,336 सरकारी स्कूल संचालित हैं।
- इनमें करीब 600 शिक्षकों के पद खाली हैं।
- रिक्त पदों के कारण कई स्कूलों में एक ही शिक्षक कई कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं।
इसका सीधा असर विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, परीक्षा परिणाम और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
किन-किन पदों पर सबसे ज्यादा कमी?
जिले में कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली हैं। इनमें शामिल हैं—
- सहायक शिक्षक
- शिक्षक (मिडिल स्कूल)
- व्याख्याता
- प्राचार्य
- प्रधान पाठक
- व्यायाम शिक्षक
- ग्रंथपाल
सबसे अधिक कमी सहायक शिक्षकों की बताई जा रही है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा असर
शिक्षकों की कमी के कारण कई समस्याएं सामने आ रही हैं—
- विद्यार्थियों को सभी विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं मिल पा रही।
- कई स्कूलों में एक शिक्षक को कई कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं।
- बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है।
- ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल सबसे अधिक प्रभावित हैं।
- विद्यार्थियों के बेहतर परिणाम और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी असर पड़ रहा है।
हालांकि जिले के छात्र हर वर्ष मेरिट सूची में स्थान बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षकों की अनुपलब्धता उनके प्रदर्शन में बाधा बन रही है।

शिक्षा विभाग का क्या कहना है?
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिले में रिक्त पदों की जानकारी और भर्ती का प्रस्ताव नियमित रूप से राज्य शासन को भेजा जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि:
- रिक्त पदों को भरने का निर्णय राज्य शासन के स्तर पर लिया जाता है।
- जब तक नई भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक खाली पदों पर नियुक्ति संभव नहीं है।
- राज्य स्तर से भर्ती होने के बाद ही इन पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
अभ्यर्थियों में बढ़ी निराशा
भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अचानक उसे निरस्त किए जाने से अभ्यर्थियों में नाराजगी है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने लगभग एक वर्ष तक पूरी प्रक्रिया पूरी की, दस्तावेज जमा किए और चयन सूची आने के बाद नियुक्ति की उम्मीद कर रहे थे। अब भर्ती रद्द होने से उन्हें दोबारा नई प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ेगा।
आगे क्या?
अब सभी की नजर राज्य शासन पर है कि राज्य स्तरीय भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होगी और जिले सहित प्रदेश के आत्मानंद स्कूलों तथा अन्य सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षकों के पद कब भरे जाएंगे। यदि जल्द भर्ती नहीं होती है, तो नए शैक्षणिक सत्र में भी हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई शिक्षक संकट के कारण प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी।



