क्राइमगरियाबंद

मृत किसान को ‘पिता’ बताकर हड़प ली ढाई एकड़ जमीन, फर्जी आधार से कराई रजिस्ट्री…

गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील क्षेत्र से जमीन हड़पने की कोशिश का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने मृत किसान को अपना पिता बताकर, पड़ोसी के आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर लगभग ढाई एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री करा ली। हालांकि ग्राम सरपंच की सतर्कता के कारण जमीन का नामांतरण नहीं हो सका और मामला उजागर हो गया। अब पटवारी, दस्तावेज तैयार करने वाले और गवाहों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

मामला क्या है?

यह मामला गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील के बजाड़ी गांव का है। यहां खसरा नंबर 12 की लगभग 2.5 एकड़ कृषि भूमि, जो रिकॉर्ड में हरिसिंह नागेश के नाम दर्ज थी, उसकी 15 अप्रैल 2025 को रजिस्ट्री कर दी गई। खरीदार बताया गया शांति लाल जैन, जबकि विक्रेता के रूप में हरिसिंह नागेश (पिता लक्ष्मण) का नाम दर्ज हुआ।

सरपंच की सतर्कता से खुला मामला

जब रजिस्ट्री के बाद नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया शुरू हुई, तब ग्राम सरपंच यशोदा नेताम ने आपत्ति जताई। गांव वालों ने बताया कि जिस व्यक्ति का नाम विक्रेता के रूप में दिखाया गया, उसे गांव में किसी ने देखा तक नहीं था। ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन वर्षों से गांव की जानकारी में थी और इसका संबंध तुकाराम कुम्हार परिवार से माना जाता रहा है।

आधार कार्ड में छेड़छाड़ का आरोप

जांच में सामने आया कि रजिस्ट्री में इस्तेमाल किया गया आधार नंबर वास्तव में हरिराम नागेश (पिता जयमल नागेश) नामक व्यक्ति का था। लेकिन रजिस्ट्री में अपलोड फोटो किसी और व्यक्ति की थी। जांच में पता चला कि जमीन बेचने वाला कथित व्यक्ति भंवर लाल नागेश (पिता लखन नागेश) है, जो आधार धारक का पड़ोसी बताया जा रहा है।

जांच में सामने आए मुख्य आरोप

  • पड़ोसी के आधार नंबर का इस्तेमाल
  • आधार में फोटो और पहचान में कथित छेड़छाड़
  • खुद को “हरिसिंह” बताकर जमीन बेचना
  • खरीदार से चेक लेकर बैंक खाते से राशि निकालना

मृत किसान को पिता बताने की कोशिश

रिपोर्ट के मुताबिक असली हरिसिंह नागेश की मृत्यु मार्च 2018 में हो चुकी थी। आरोप है कि इसके बाद जमीन पर कब्जा जमाने की योजना बनाई गई। मार्च 2022 में भंवर लाल की पत्नी प्रभंजली ने मैनपुर तहसील में आवेदन देकर मृत हरिसिंह को अपना पिता बताया और नाम दर्ज कराने की कोशिश की। हालांकि इश्तहार जारी होने के बाद यह प्रयास सफल नहीं हो सका।

जांच के दायरे में कौन-कौन?

देवभोग उपपंजीयक कार्यालय के प्रभारी सहायक पंजीयक अजय चंद्रवंशी ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि उस समय आधार की ई-केवाईसी अनिवार्य नहीं थी, इसलिए प्रस्तुत दस्तावेज और गवाहों के आधार पर रजिस्ट्री हो गई।

अब जांच इन बिंदुओं पर होगी:

  • जाली आधार कार्ड किसने बनाया?
  • भूमि रिकॉर्ड की नकल किसने जारी की?
  • फौती दर्ज कराने में किसकी भूमिका थी?
  • रजिस्ट्री के दस्तावेज किसने तैयार किए?
  • गवाहों और प्रस्तुतकर्ता की भूमिका क्या थी?

मुख्य बातें एक नजर में

जिला

गरियाबंद

तहसील

अमलीपदर

भूमि

2.5 एकड़ कृषि भूमि

रजिस्ट्री तिथि

15 अप्रैल 2025

मुख्य आरोप

जाली आधार से जमीन रजिस्ट्री

जांच एजेंसी

देवभोग उपपंजीयक कार्यालय

जांच में शामिल

पटवारी, गवाह, दस्तावेज तैयार करने वाले

अब आगे क्या?

फिलहाल नामांतरण रुक गया है और पूरा मामला कूट रचना (फर्जीवाड़ा) मानकर जांच की जा रही है। यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे गंभीर मामले दर्ज हो सकते हैं।

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