मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी पहल: ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ से हर पात्र परिवार तक पहुंचेगा सरकार की 31 योजनाओं का लाभ…

रायपुर, 19 जून 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में सुशासन को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक नई और महत्वाकांक्षी पहल शुरू करने जा रही है। राज्य सरकार ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ प्रारंभ कर रही है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक पात्र परिवार तक सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में 31 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण (Saturation) पर केंद्रित होगा और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना केवल सड़क, भवन और अन्य अधोसंरचनाओं के निर्माण से पूरा नहीं होगा, बल्कि तब साकार होगा जब शासन की प्रत्येक योजना का लाभ समय पर प्रत्येक पात्र नागरिक और परिवार तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित कर रही है, जिसमें नागरिकों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि शासन स्वयं पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़े। ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ इसी सोच का विस्तार है।
नियद नेल्लानार मॉडल की सफलता से मिली प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में बस्तर संभाग में शुरू की गई ‘नियद नेल्लानार’ योजना ने शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत पुल बनाया। इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में विभिन्न विभागों की सेवाओं को एक मंच पर लाकर लोगों तक पहुंचाया गया। इसकी सफलता को देखते हुए इसे ‘नियद नेल्लानार 2.0’ के रूप में 10 जिलों तक विस्तारित किया गया।
अब इसी सफल मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करते हुए ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ शुरू किया जा रहा है, जिससे बस्तर के बाहर के 23 जिलों में भी लोगों को योजनाओं का समग्र लाभ मिल सके।
23 जिलों में चलेगा अभियान
यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के कुल 23 जिलों में संचालित होगा।
इनमें रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, महासमुंद, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगांव, सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर तथा मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले शामिल हैं।
31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा शत-प्रतिशत संतृप्तिकरण
अभियान के तहत विभिन्न विभागों की 31 प्रमुख योजनाओं को एकीकृत किया गया है ताकि पात्र परिवार किसी भी योजना से वंचित न रहें।
इन योजनाओं में प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- मनरेगा जॉब कार्ड
- प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
- जल जीवन मिशन
- राशन कार्ड एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
- आयुष्मान भारत योजना
- वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
- किसान क्रेडिट कार्ड
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना
- जननी सुरक्षा योजना
- मिशन इंद्रधनुष
- महतारी वंदन योजना
- जन-धन योजना
- कौशल विकास योजनाएं
- श्रम कार्ड
- वनाधिकार पट्टा
- आधार कार्ड
- विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं सहित अन्य हितग्राही योजनाएं।
इन योजनाओं के माध्यम से परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, कृषि सहायता, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास का व्यापक लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
विभागीय अभिसरण से बनेगी एकीकृत व्यवस्था
‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा मंच पर लाया जाएगा। इससे किसी परिवार को किन-किन योजनाओं का लाभ मिला है और कौन-सी योजनाओं से वह अभी वंचित है, इसकी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगी।
इस व्यवस्था से योजनाओं की निगरानी, पात्रता का निर्धारण और लाभ वितरण अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी होगा।
CHiPS तैयार करेगा हाईटेक डिजिटल डैशबोर्ड
अभियान की निगरानी के लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा अत्याधुनिक ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड’ विकसित किया जाएगा।
इस डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से राज्य, संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और गांव स्तर तक प्रत्येक योजना की वास्तविक समय (रियल-टाइम) प्रगति देखी जा सकेगी।
डैशबोर्ड पर यह जानकारी उपलब्ध होगी कि—
- किस योजना में कितने हितग्राही जुड़ चुके हैं।
- कितने पात्र परिवार अभी शेष हैं।
- संतृप्तिकरण का प्रतिशत कितना है।
- किस जिले या पंचायत में कार्य की स्थिति क्या है।
इससे सरकार त्वरित निर्णय लेने के साथ आवश्यक सुधार भी समय रहते कर सकेगी।
तीन चरणों में होगा अभियान का संचालन
अभियान को सुव्यवस्थित ढंग से तीन चरणों में लागू किया जाएगा।
पहला चरण में ग्रामवार सर्वेक्षण किया जाएगा। PDS डाटा और विभागीय अभिलेखों के आधार पर पात्र परिवारों की पहचान कर बेसलाइन तैयार की जाएगी।
दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर और विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र लोगों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेज और सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
तीसरे चरण में लगातार निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि जहां कमी हो, वहां तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
जिला प्रशासन की होगी अहम भूमिका
अभियान के सफल संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन पर होगी।
जिला कलेक्टर पूरे अभियान के नोडल अधिकारी होंगे और सर्वेक्षण, शिविरों के आयोजन तथा योजनाओं के संतृप्तिकरण की निगरानी करेंगे।
संभागायुक्त त्रैमासिक समीक्षा करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समिति पूरे अभियान की नियमित समीक्षा और मूल्यांकन करेगी।
अलग बजट नहीं, विभागीय योजनाओं से होगा संचालन
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान के लिए अलग से कोई नया बजट नहीं बनाया जाएगा।
संबंधित विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों से ही कार्य करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर CSR, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा अन्य संस्थागत संसाधनों का भी अभिसरण किया जाएगा, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ केवल योजनाओं के वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित सुशासन का व्यापक अभियान है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसर पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश का अंतिम व्यक्ति भी शासन की योजनाओं का लाभ प्राप्त करेगा और प्रत्येक पात्र परिवार सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त होगा, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा। यह अभियान सुशासन के नए मानक स्थापित करते हुए प्रदेश के विकास को अधिक समावेशी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाएगा।



