छत्तीसगढ़

हाई कोर्ट रोस्टर में 8 अप्रैल से बदलाव, चीफ जस्टिस की डीबी सुनेगी PIL, हेबियस कॉर्पस और अहम आपराधिक मामले….

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में 8 अप्रैल 2026 से नया रोस्टर लागू होने जा रहा है। इस बदलाव के बाद अदालत में तीन डिवीजन बेंच (DB) और 13 सिंगल बेंच नियमित रूप से मामलों की सुनवाई करेंगी। नए रोस्टर को लेकर वकीलों, वादकारियों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों में खास रुचि है, क्योंकि इससे यह तय होगा कि किस तरह के मामले अब किस बेंच के सामने सूचीबद्ध होंगे। हाई कोर्ट की वेबसाइट पर 8 अप्रैल से प्रभावी नया रोस्टर “लेटेस्ट नोटिफिकेशन” में प्रदर्शित है।

नए रोस्टर के अनुसार, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच को कई संवेदनशील, महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े मामलों की सुनवाई सौंपी गई है। वहीं दूसरी और तीसरी डिवीजन बेंच को सिविल, कंपनी, टैक्स, अल्ट्रा वायर्स और अन्य आपराधिक मामलों का दायित्व दिया गया है। इसके अलावा सिंगल बेंचों के जरिए नियमित न्यायिक कार्यवाही भी तेज और व्यवस्थित रूप से संचालित की जाएगी।


चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच किन मामलों की करेगी सुनवाई

नए रोस्टर में पहली डिवीजन बेंच में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल शामिल रहेंगे। यह बेंच हाई कोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करेगी।

इस बेंच के समक्ष प्रमुख रूप से ये मामले आएंगे—

  • सभी जनहित याचिकाएं (PIL)
  • हेबियस कॉर्पस याचिकाएं
  • वर्ष 2020 तक की आपराधिक अपीलें
  • क्रिमिनल कंटेम्प्ट (अवमानना) याचिकाएं
  • धारा 482 CrPC/समकक्ष अंतर्निहित शक्तियों से जुड़े आवेदन
  • धारा 419 और 378 से जुड़े प्रकरण
  • अन्य विशेष रूप से सूचीबद्ध मामले

इसका सीधा मतलब यह है कि जनहित, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, आपराधिक न्याय और न्यायालय की अवमानना जैसे मामलों की सुनवाई अब सीधे मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष होगी। ऐसे मामलों को न्यायिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, इसलिए इस बेंच की भूमिका बेहद अहम होगी।


दूसरी डिवीजन बेंच सुनेगी सिविल, कंपनी और टैक्स से जुड़े मामले

नए रोस्टर में दूसरी डिवीजन बेंच में जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत को शामिल किया गया है।

यह बेंच मुख्य रूप से निम्न मामलों की सुनवाई करेगी—

  • सभी सिविल मामले
  • कंपनी अपीलें
  • टैक्स मामले
  • वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामले
  • कमर्शियल अपीलेट (Commercial Appellate) मामलों की सुनवाई

यह बेंच विशेष रूप से उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण होगी, जिनका संबंध व्यावसायिक विवाद, कराधान, कॉर्पोरेट मामलों और संवैधानिक वैधता से जुड़ा है। व्यापारिक और संस्थागत पक्षों के लिए यह बेंच आने वाले समय में काफी अहम मानी जाएगी।


तीसरी डिवीजन बेंच देखेगी शेष आपराधिक और विशेष मामले

रोस्टर में तीसरी डिवीजन बेंच में जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस एन.के. व्यास को जिम्मेदारी दी गई है।

यह बेंच मुख्य रूप से उन आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी, जो किसी अन्य डिवीजन बेंच को आवंटित नहीं किए गए हैं। इसके अलावा—

  • वर्ष 2016 तक की इक्विटल (Acquittal) अपीलें
  • वर्ष 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामले
  • अन्य विशेष श्रेणी के आपराधिक प्रकरण

इससे साफ है कि हाई कोर्ट ने पुराने लंबित मामलों के निपटारे और केस लोड के संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह विभाजन किया है।


13 सिंगल बेंचों में होगी नियमित सुनवाई

तीन डिवीजन बेंचों के अलावा, हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की स्पेशल सिंगल बेंच सहित कुल 13 सिंगल बेंच निर्धारित की गई हैं। इन सिंगल बेंचों में अलग-अलग न्यायाधीशों को विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी जाएगी।

सिंगल बेंचों का महत्व इसलिए भी ज्यादा होता है क्योंकि अधिकांश रिट याचिकाएं, जमानत आवेदन, सेवा विवाद, सिविल रिवीजन, अंतरिम राहत और दैनिक सुनवाई वाले मामले पहले चरण में इन्हीं बेंचों के सामने आते हैं। ऐसे में रोस्टर का यह पुनर्गठन न्यायिक कार्यप्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बना सकता है।


रोस्टर बदलाव का क्या होगा असर?

हाई कोर्ट के रोस्टर में बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होता, बल्कि इसका सीधा असर मामलों की लिस्टिंग, सुनवाई की गति और न्यायिक प्राथमिकताओं पर पड़ता है।

इस बदलाव से संभावित तौर पर ये प्रभाव देखने को मिल सकते हैं—

  • मामलों की स्पष्ट श्रेणीवार सुनवाई
  • लंबित पुराने मामलों के निपटारे में तेजी
  • जनहित और आपराधिक मामलों की प्राथमिक सुनवाई
  • सिविल और कमर्शियल विवादों की बेहतर सूचीबद्धता
  • वकीलों और पक्षकारों के लिए बेंच निर्धारण में स्पष्टता

कई बार रोस्टर में बदलाव के बाद वकीलों को अपने मामलों की नई बेंच के अनुसार रणनीति और उपस्थिति तय करनी पड़ती है। ऐसे में यह बदलाव न्यायिक समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


क्यों अहम है चीफ जस्टिस की बेंच?

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच को आमतौर पर संवैधानिक, जनहित, संवेदनशील और नीति-स्तर के प्रभाव वाले मामलों की सुनवाई दी जाती है। इस बार भी वही संकेत देखने को मिल रहे हैं। PIL, हेबियस कॉर्पस और क्रिमिनल अपीलों जैसे मामलों को पहली डिवीजन बेंच को सौंपना यह दर्शाता है कि अदालत ने जनमहत्व और मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी है।


एक नजर में नया रोस्टर

डिवीजन बेंच-1

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा + जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल

  • PIL
  • हेबियस कॉर्पस
  • 2020 तक की क्रिमिनल अपील
  • क्रिमिनल कंटेम्प्ट
  • धारा 482 आवेदन
  • 419, 378 के प्रकरण

डिवीजन बेंच-2

जस्टिस संजय के. अग्रवाल + जस्टिस सचिन सिंह राजपूत

  • सभी सिविल मामले
  • कंपनी अपील
  • टैक्स मामले
  • 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामले
  • कमर्शियल अपीलेट

डिवीजन बेंच-3

जस्टिस संजय अग्रवाल + जस्टिस एन.के. व्यास

  • अन्य शेष क्रिमिनल मामले
  • 2016 तक की इक्विटल अपील
  • 2022 तक के अल्ट्रा वायर्स मामले

सिंगल बेंच

  • कुल 13 सिंगल बेंच
  • चीफ जस्टिस की स्पेशल सिंगल बेंच भी शामिल

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में 8 अप्रैल से लागू होने वाला नया रोस्टर न्यायिक कार्यप्रणाली को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल मामलों के वर्गीकरण में स्पष्टता आएगी, बल्कि पुराने लंबित प्रकरणों के निपटारे और न्यायिक दक्षता में भी सुधार की उम्मीद है।

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