
देशभर में विभिन्न ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आज भारत बंद का आह्वान किया है। इस बंद का असर कई राज्यों में देखने को मिल रहा है। राजधानी रायपुर में भी कर्मचारी और किसान संगठनों ने प्रदर्शन और सभा का आयोजन किया है। बंद के दौरान श्रमिक संगठनों ने श्रम कानूनों में बदलाव, निजीकरण और आर्थिक नीतियों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

🔴 रायपुर में प्रदर्शन और संयुक्त सभा
रायपुर में सुबह से ही विरोध प्रदर्शन की गतिविधियां शुरू हो गईं। चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में कर्मचारी भवन बुढ़ापारा से रैली निकाली गई, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। इसके बाद सुबह 11 बजे पंडरी स्थित एलआईसी कार्यालय के पास संयुक्त सभा आयोजित की जा रही है। इस सभा में कर्मचारी संगठनों और किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपने विचार रखेंगे।
यह प्रदर्शन 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के बैनर तले किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन श्रमिकों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
⚖️ किन मुद्दों को लेकर विरोध
प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार की जिन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
- चार नई श्रम संहिताएं (लेबर कोड)
- सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण
- विनिवेश नीति
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा
- श्रमिक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा में बदलाव
आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इन नीतियों से सार्वजनिक क्षेत्र कमजोर होगा और श्रमिकों के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उनका कहना है कि श्रम कानूनों में किए गए बदलाव से नौकरी की सुरक्षा कम होगी और ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा।
🚜 किसान संगठनों का समर्थन
इस बंद को किसान संगठनों का भी समर्थन मिला है। किसान नेता कृषि नीतियों, समर्थन मूल्य (MSP) और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार को श्रमिक और किसान हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
👮 प्रशासन की तैयारी
भारत बंद को देखते हुए प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
📌 व्यापक असर की संभावना
हालांकि आवश्यक सेवाओं को बंद से अलग रखने की बात कही गई है, फिर भी परिवहन, बैंकिंग, बीमा और कुछ सरकारी व निजी संस्थानों के कामकाज पर आंशिक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आयोजकों ने बड़ी संख्या में श्रमिकों, कर्मचारियों और किसानों से बंद को सफल बनाने की अपील की है।
भारत बंद के इस आह्वान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज है। अब यह देखना होगा कि बंद का प्रदेश और देश में कितना व्यापक असर पड़ता है।



