
रायपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रविवार 8 फरवरी को रायपुर दौरे पर रहेंगे, जहां वे वामपंथी उग्रवाद (LWE) यानी नक्सलवाद की स्थिति और उससे निपटने की रणनीति को लेकर हाई लेवल मीटिंग करेंगे। इस बैठक को छत्तीसगढ़ सहित नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के साथ भविष्य की कार्ययोजना तय की जाएगी।

सुबह से शुरू होगा बैठकों का दौर
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सुबह 11 बजे से अपने आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत करेंगे। दिनभर विभिन्न विभागों और अधिकारियों के साथ चर्चा का सिलसिला चलेगा। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों, खुफिया विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से जमीनी स्थिति की विस्तृत जानकारी ली जाएगी।
शाम 5 बजे होगी नक्सलवाद पर हाई लेवल मीटिंग
शाम 5 बजे से अमित शाह नक्सलवाद पर एक हाई लेवल समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में केंद्र सरकार और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसमें मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर चर्चा होने की संभावना है—
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की वर्तमान सुरक्षा स्थिति
- हाल के नक्सली घटनाओं की समीक्षा
- सुरक्षा बलों की तैनाती और ऑपरेशन की रणनीति
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्रगति
- केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को और मजबूत करना
बैठक में LWE (Left Wing Extremism) प्रभावित इलाकों में सुरक्षा अभियान को और तेज करने तथा नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के लिए नई रणनीति तैयार की जा सकती है।
विकास और सुरक्षा दोनों पर रहेगा फोकस
केंद्र सरकार की नीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। बैठक में इन विकास योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि स्थानीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
निजी कार्यक्रम और रात्रि विश्राम
हाई लेवल मीटिंग के बाद अमित शाह शाम 5 बजे से 6.10 बजे तक एक निजी कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वे रायपुर के एक निजी होटल में रात्रि विश्राम करेंगे। उनके दौरे को देखते हुए राजधानी रायपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस व प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
छत्तीसगढ़ के लिए अहम माना जा रहा दौरा
अमित शाह का यह दौरा छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य के बस्तर संभाग सहित कई क्षेत्र लंबे समय से नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। इस बैठक से सुरक्षा अभियान को नई दिशा मिलने और नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।



