
- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में लगातार अपना नौवां बजट पेश कर रही हैं, जो रिकॉर्ड की बात भी है।
- कैबिनेट ने बजट 2026-27 को मंज़ूरी दे दी है, जिसमें आर्थिक वृद्धि, रोजगार, निवेश और कृषि जैसे क्षेत्रों पर फोकस बताया गया है।
नई दिल्ली।
देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला केंद्रीय बजट 2026-27 आज संसद में पेश किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुत कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया। इससे पहले किसी भी वित्त मंत्री ने लगातार इतने अधिक बजट पेश नहीं किए थे, जिससे यह बजट राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

🏛️ कैबिनेट से मिली मंजूरी
बजट पेश होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें बजट 2026-27 को औपचारिक मंजूरी दी गई। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद वित्त मंत्री ने बजट दस्तावेज संसद में रखा।
📈 आर्थिक वृद्धि पर फोकस
सरकार ने इस बजट में
- आर्थिक विकास (Economic Growth)
- रोजगार सृजन (Employment Generation)
- निवेश बढ़ाने (Investment Push)
- और कृषि क्षेत्र को मजबूती
जैसे प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया है।
सरकार का लक्ष्य है कि भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को और गति दी जाए, ताकि आने वाले वर्षों में देश वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में और मजबूत होकर उभरे।
👩🌾 किसान, युवा और मध्यम वर्ग पर नजर
सूत्रों के मुताबिक बजट में
- किसानों की आय बढ़ाने,
- युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर,
- स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहन,
- तथा मध्यम वर्ग को राहत देने
जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई है।
🌐 वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलन
वैश्विक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई जैसी चुनौतियों के बीच यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखते हुए बुनियादी ढांचे और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का संकेत दिया है।
🔍 सभी की नजरें बजट घोषणाओं पर
अब देशभर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि
- टैक्स स्लैब में क्या बदलाव होते हैं,
- किसानों और गरीब वर्ग को क्या राहत मिलती है,
- राज्यों को कितना वित्तीय समर्थन मिलता है,
- और आम जनता की जेब पर बजट का क्या असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार के विकास विजन और आर्थिक रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में देश की दिशा और दशा तय करेगा।



