आस्था से सजी देश की तस्वीर: मंदिरों और तीर्थों में गूंजे भजन-कीर्तन

देशभर में इस समय माघ मास और माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा का अद्भुत माहौल बना हुआ है। गंगा, नर्मदा, शिप्रा, गोदावरी और महानदी जैसे पवित्र नदियों के तटों पर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। माना जाता है कि इस काल में किया गया स्नान, दान और जप-तप विशेष पुण्य प्रदान करता है।
कई मंदिरों में अखंड राम नाम संकीर्तन, हनुमान चालीसा पाठ, शिव अभिषेक और विष्णु सहस्रनाम के आयोजन हो रहे हैं। खास बात यह है कि युवाओं और बच्चों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जो आस्था के साथ-साथ संस्कारों के संरक्षण का भी संकेत है।
साथ ही, देश के कई प्रमुख तीर्थस्थलों पर भंडारे, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और सेवा कार्य किए जा रहे हैं, जहाँ श्रद्धा के साथ मानवता की सेवा भी देखने को मिल रही है।

👉 कुल मिलाकर, आस्था, सेवा और सकारात्मक ऊर्जा से भरा यह समय लोगों के मन में शांति, विश्वास और उम्मीद जगा रहा है।
इन दिनों देशभर में भक्ति, सेवा और सकारात्मकता का माहौल देखने को मिल रहा है। माघ मास के पावन समय में गंगा, नर्मदा, शिप्रा, गोदावरी, महानदी और अन्य पवित्र नदियों के तटों पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ रही है। सुबह तड़के हर-हर गंगे, हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयकारों के बीच श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। मान्यता है कि माघ स्नान से पापों का क्षय होता है और मन को शांति मिलती है।
देश के कई प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, रामचरितमानस पाठ, सुंदरकांड, विष्णु सहस्रनाम और अखंड भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। खास बात यह है कि केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा और बच्चे भी बड़ी श्रद्धा के साथ इन आयोजनों में भाग ले रहे हैं। इससे यह संदेश मिल रहा है कि नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और आस्था से जुड़ रही है।
आस्था के साथ-साथ सेवा कार्य भी लगातार बढ़ रहे हैं। कई धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा
- निःशुल्क भंडारे
- गरीबों को कंबल व वस्त्र वितरण
- जरूरतमंदों के लिए चिकित्सा शिविर
- गौशालाओं में सेवा और चारा वितरण
जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि मानव सेवा से भी जुड़ी होती है।
इसके अलावा, मंदिरों और तीर्थस्थलों पर शांति, अनुशासन और स्वच्छता को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। श्रद्धालु स्वयं साफ-सफाई का ध्यान रख रहे हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
👉 कुल मिलाकर, यह समय यह संदेश दे रहा है कि आस्था लोगों को जोड़ रही है, मन को शांति दे रही है और समाज में सेवा व सद्भाव की भावना को मजबूत कर रही है। यही सच्ची अच्छी खबर है — दिल को सुकून देने वाली और उम्मीद जगाने वाली 🙏



