8वें वेतन आयोग में बड़ा बदलाव संभव? 18 की जगह 7 पे लेवल करने की मांग, लाखों केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने की उम्मीद….

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आयोग को अपनी सिफारिशें 2027 के अंत तक केंद्र सरकार को सौंपनी हैं, लेकिन उससे पहले कर्मचारी संगठनों की ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए जा रहे हैं। इन्हीं में सबसे बड़ा प्रस्ताव नेशनल काउंसिल–जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की ओर से आया है।
संगठन ने मौजूदा 18 पे लेवल की व्यवस्था को सरल बनाकर सिर्फ 7 पे लेवल करने की मांग की है। उनका तर्क है कि जिन पे लेवल्स में काम, जिम्मेदारियां और वेतन का अंतर बहुत कम है, उन्हें एक साथ मिला दिया जाए। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है और साथ ही 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।

क्यों उठी पे लेवल मर्ज करने की मांग?
NC-JCM का कहना है कि वर्तमान वेतन संरचना में कई ऐसे पे लेवल हैं, जिनमें कर्मचारियों की जिम्मेदारियां लगभग समान हैं, लेकिन वेतन और पदोन्नति (Promotion) में काफी अंतर है। इससे कर्मचारियों के बीच असमानता की भावना पैदा होती है और करियर ग्रोथ भी प्रभावित होती है।
संगठन का मानना है कि समान प्रकृति के पदों को एक ही पे लेवल में लाने से वेतन संरचना अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनेगी।
किन-किन पे लेवल को मर्ज करने का प्रस्ताव?
NC-JCM ने निम्नलिखित पे लेवल्स के विलय का सुझाव दिया है—
- लेवल-2 और लेवल-3 को एक किया जाए।
- लेवल-4 और लेवल-5 का विलय किया जाए।
- लेवल-6 और लेवल-7 को एक पे लेवल बनाया जाए।
- लेवल-8 और लेवल-9 को भी एक साथ जोड़ा जाए।
इस तरह वर्तमान के 18 पे लेवल घटाकर 7 पे लेवल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
लेवल-5 कर्मचारियों के लिए अलग मांग
NC-JCM ने विशेष रूप से रेलवे, डाक विभाग और अन्य केंद्रीय विभागों में कार्यरत लेवल-5 कर्मचारियों को सीधे लेवल-6 में अपग्रेड करने की मांग भी की है।
संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों को—
- बेहतर बेसिक वेतन मिलेगा।
- प्रमोशन के अवसर बढ़ेंगे।
- करियर ग्रोथ तेज होगी।
- वेतन विसंगतियां कम होंगी।
अगर 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ तो कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
कर्मचारी संगठन के अनुमान के अनुसार, यदि 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है और पे लेवल मर्जर को भी मंजूरी मिलती है, तो वेतन में बड़ी बढ़ोतरी संभव है।
संभावित अनुमान इस प्रकार हैं—
- न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है।
- लेवल-2 के कर्मचारियों का बेसिक वेतन 80,000 रुपये से अधिक हो सकता है।
- लेवल-4 और लेवल-5 के विलय के बाद बने नए लेवल में कर्मचारियों का वेतन 1 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है।
हालांकि ये आंकड़े NC-JCM के प्रस्तावित अनुमान हैं। सरकार या 8वें वेतन आयोग ने अभी इन पर कोई आधिकारिक सहमति नहीं दी है।
पे लेवल कम होने से क्या होंगे फायदे?
संगठन के मुताबिक पे लेवल्स की संख्या कम करने से कई सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं—
- वेतन संरचना अधिक सरल और पारदर्शी होगी।
- प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी।
- कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का स्पष्ट रोडमैप मिलेगा।
- प्रमोशन में होने वाली देरी और असमानता कम हो सकती है।
- समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच वेतन अंतर घटेगा।
- करियर प्रगति अधिक व्यवस्थित होगी।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल 8वें वेतन आयोग ने न तो पे लेवल मर्ज करने पर और न ही 3.833 फिटमेंट फैक्टर पर कोई अंतिम निर्णय लिया है।
आयोग वर्तमान में विभिन्न कर्मचारी संगठनों, विभागों और संबंधित पक्षों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। इन सभी सुझावों का अध्ययन करने के बाद आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।
कब आएगा अंतिम फैसला?
निर्धारित समय-सीमा के अनुसार—
- 2027 के अंत तक 8वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप सकता है।
- इसके बाद केंद्र सरकार सिफारिशों पर विचार करेगी।
- अंतिम निर्णय सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद ही लागू होगा।
फिलहाल कर्मचारियों के लिए क्या जानना जरूरी है?
इस समय 18 पे लेवल को 7 पे लेवल करने, लेवल-5 को लेवल-6 में अपग्रेड करने और 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने जैसी सभी बातें कर्मचारी संगठन NC-JCM के प्रस्ताव हैं। इन्हें अभी न तो 8वें वेतन आयोग ने मंजूरी दी है और न ही केंद्र सरकार ने कोई अंतिम फैसला लिया है। इसलिए कर्मचारियों को इन प्रस्तावों को संभावित सुझाव के रूप में ही देखना चाहिए, न कि अंतिम निर्णय के रूप में।



