सियोल में छत्तीसगढ़–कोरिया साझेदारी की नई शुरुआत, CM विष्णुदेव साय ने KITA से की मुलाकात

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान आज राजधानी सियोल में एशिया के सबसे बड़े व्यापार संगठन कोरिया इंटरनेशनल ट्रेड एसोसिएशन (KITA) के चेयरमैन श्री जिन सिक युन और वाइस प्रेसिडेंट श्री किम की ह्यून से मुलाकात की। 77,000 से अधिक सदस्य कंपनियों वाला यह संगठन एशिया का अग्रणी व्यापारिक मंच माना जाता है।

बैठक में मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नीति 2024–30, राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और कुशल मानव संसाधन की ताकत को रेखांकित करते हुए निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और स्किलिंग के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि—
“दक्षिण कोरिया के साथ हमारे संबंध केवल व्यापारिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भी हैं। आज का यह संवाद छत्तीसगढ़ और कोरिया के बीच निवेश, तकनीकी सहयोग और कौशल विकास के नए द्वार खोलेगा। इससे युवाओं को आधुनिक उद्योगों में अवसर प्राप्त होंगे और प्रदेश का औद्योगिक विकास नई गति पकड़ेगा।”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेशकों को सुगम वातावरण, त्वरित स्वीकृतियाँ और आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
KITA के चेयरमैन श्री जिन सिक युन और वाइस प्रेसिडेंट श्री किम की ह्यून ने भी छत्तीसगढ़ की नीतियों और संसाधनों में गहरी रुचि व्यक्त करते हुए कहा कि कोरियाई कंपनियाँ छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं और निकट भविष्य में ठोस साझेदारी के कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस सहयोग से छत्तीसगढ़ के किसानों, श्रमिकों और स्थानीय उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ होगा। खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, स्टील और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश से हजारों रोजगार अवसर सृजित होंगे। तकनीकी हस्तांतरण से स्थानीय उद्योगों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ न केवल प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है, बल्कि यहाँ का युवा वर्ग मेहनती और कुशल भी है। कोरियाई कंपनियों के साथ साझेदारी से युवाओं को स्किलिंग और तकनीकी प्रशिक्षण के नए अवसर मिलेंगे, जिससे प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा और आने वाले वर्षों में राज्य आत्मनिर्भरता और वैश्विक साझेदारी का आदर्श उदाहरण बनेगा।